भविष्य की ऊर्जा का हब भी बन रहा जामनगर
नवयुग गुजरात ना शिल्पी मुकेश अंबानी ने जामनगर को बनाया दुनिया का एनर्जी रिफाइनिंग हब

जामनगर : जहां रिफाइन होती है दुनिया की एनर्जी

पिता के सपने को और बड़ा बनाते हुए 'नवयुग गुजरात ना शिल्पी' मुकेश अंबानी ने जामनगर को बनाया दुनिया का एनर्जी रिफाइनिंग हब
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तीन पीढ़ियां, एक सपना : भाग-2

धीरूभाई अंबानी ने आम बचतकर्ताओं को शेयर बाजार के माध्यम से उद्योगों की प्रगति में भागीदार बनाया, वहीं उनके बेटे मुकेश अंबानी ने विरासत में मिली इस सोच को आगे बढ़ाया और रिलायंस को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया।आज एक भारतीय परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी पर नजर डालें तो कपड़ों से लेकर खरीदारी, मनोरंजन, मोबाइल और इंटरनेट तक अनेक क्षेत्रों में रिलायंस की मौजूदगी दिखाई देती है। एक ही पीढ़ी में रिलायंस ने भारतीयों के जीवन के कई पहलुओं में अपनी जगह बनाई है।रिलायंस की शुरुआत नरोदा की कपड़ा मिल से हुई थी। इसने कंपनी को भारतीय घरों तक पहुंचाया। मुकेश अंबानी ने इस जुड़ाव को और व्यापक बनाया। रिलायंस रिटेल के माध्यम से बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी संगठित खरीदारी का विस्तार हुआ। इसके बाद मीडिया, मनोरंजन और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में कंपनी की पहुंच बढ़ी। फिर दूरसंचार के क्षेत्र में कदम रखते हुए रिलायंस लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गई।इस तरह कंपनी का सफर कपड़ों के लिए धागा बनाने से आगे बढ़कर लोगों की खरीदारी, मनोरंजन और आपसी संपर्क तक पहुंच गया।

विरासत को संभालने से आगे, उसे कई गुना बड़ा बनाने की चुनौती

किसी बड़े उद्योग को खड़ा करना कठिन काम है। लेकिन पहले से स्थापित विशाल कारोबार की जिम्मेदारी संभालकर उसे और बड़ा बनाना भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।वर्ष 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के समय रिलायंस देश के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक समूहों में शामिल हो चुका था। बहुत से लोगों को उम्मीद थी कि मुकेश अंबानी अपने पिता की बनाई कंपनी को संभालेंगे और उसकी उपलब्धियों को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन मुकेश अंबानी ने इससे भी बड़ा लक्ष्य तय किया।उन्होंने अपने पिता की उस सोच को आगे बढ़ाया, जिसमें बड़े सपने देखने, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर पहले से निवेश करने और पूरे उद्योग की दिशा बदलने का साहस शामिल था। नए कारोबार में उतरने के मामले में भी उन्होंने धीरूभाई अंबानी के रास्ते को अपनाया। ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना, जिनमें भविष्य में बड़ी संभावनाएं हों, बड़े स्तर पर निवेश करना, पुरानी धारणाओं को चुनौती देना और नए बाजार तैयार करना इस रणनीति के प्रमुख हिस्से रहे। यही सोच रिलायंस के विस्तार की आधारशिला बनी।

जामनगर : भारत की औद्योगिक क्षमता का वैश्विक प्रतीक

मुकेश अंबानी की इस महत्वाकांक्षा को समझने के लिए गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित जामनगर को देखना जरूरी है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व में जामनगर दुनिया के सबसे बड़े एकल-स्थल तेल शोधन परिसरों में विकसित हुआ। यहां भारतीय इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षमता ने वैश्विक स्तर पर अपनी ताकत दिखाई। इस परिसर में कच्चे तेल को उपयोगी पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने का काम होता है, जिनकी जरूरत दुनिया के अनेक बाजारों को पड़ती है।जामनगर केवल गुजरात का एक औद्योगिक केंद्र बनकर नहीं रह गया। इसने राज्य में निवेश को बढ़ावा दिया, रोजगार के अवसर पैदा किए और स्थानीय लोगों के लिए नए कौशल सीखने की संभावनाएं खोलीं। इसके साथ ही यहां आपूर्तिकर्ताओं और विभिन्न सेवाएं देने वाली कंपनियों का एक व्यापक तंत्र विकसित हुआ। इस औद्योगिक विस्तार ने गुजरात को दुनिया के ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। लेकिन रिलायंस की जामनगर यात्रा केवल पारंपरिक ऊर्जा तक सीमित नहीं है। इसी क्षेत्र में आज धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स भी स्थापित किया जा रहा है, जो भविष्य की ऊर्जा के क्षेत्र में कंपनी के प्रवेश का प्रतीक है।इस बदलाव का महत्व इसलिए भी है कि ऊर्जा क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नई क्षमताएं विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। एक ओर जामनगर पारंपरिक ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की औद्योगिक शक्ति का उदाहरण है, तो दूसरी ओर ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स भविष्य की ऊर्जा के प्रति रिलायंस की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

आम निवेशकों के साथ रिश्ता आज भी कायम

रिलायंस के विस्तार और बदलावों के बीच धीरूभाई अंबानी की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लगातार बना रहा- आम निवेशकों के साथ कंपनी का जुड़ाव। वर्ष 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम ने एक बड़े सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से पूंजी बाजार में प्रवेश किया। इससे रिलायंस के एक और बड़े कारोबार में आम निवेशकों की भागीदारी का अवसर मिला। वर्ष 2009 में रिलायंस पेट्रोलियम का रिलायंस इंडस्ट्रीज में विलय हो गया।जिन परिवारों ने वर्ष 1977 से रिलायंस की यात्रा को देखा था और कंपनी के साथ निवेशक के रूप में जुड़े थे, उनके लिए यह उस लंबे रिश्ते का एक और अध्याय था। धीरूभाई अंबानी ने देश के मध्यम वर्ग को यह भरोसा दिया था कि वह भी बड़े औद्योगिक विकास का हिस्सेदार बन सकता है। शेयरों के माध्यम से आम लोगों को उद्योगों की प्रगति में भाग लेने का अवसर देना उनकी सोच का महत्वपूर्ण पहलू था।मुकेश अंबानी ने इसी औद्योगिक प्रगति को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का काम किया। उन्होंने दिखाया कि भारतीय उद्यम किस तरह बड़े पैमाने पर कारोबार खड़ा कर सकते हैं और दुनिया के बाजारों में अपनी जगह बना सकते हैं।इसीलिए मुकेश अंबानी को ‘नवयुग गुजरात ना शिल्पी’, यानी नए युग के गुजरात का शिल्पकार, कहना उचित है।

यह केवल एक परिवार की उपलब्धि नहीं

जामनगर की कहानी को केवल अंबानी परिवार या रिलायंस की सफलता के रूप में देखना इसकी पूरी तस्वीर नहीं होगी। इस औद्योगिक परिसर के निर्माण और संचालन में गुजरात की जमीन, उसका समुद्री तट, वहां के श्रमिक और स्थानीय समुदायों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।यह विकास उन लोगों की मेहनत और भागीदारी से जुड़ा है, जिन्होंने इस औद्योगिक व्यवस्था को खड़ा करने और चलाने में योगदान दिया। इसके साथ ही यह उस भरोसे और साझेदारी को भी दर्शाता है, जो रिलायंस की यात्रा में अलग-अलग पीढ़ियों के साथ आगे बढ़ी है।वर्ष 1977 में कंपनी के शेयरधारकों के रूप में शुरू हुआ जुड़ाव समय के साथ व्यापक हुआ। आज रिलायंस की वैश्विक पहुंच के पीछे उन समुदायों और लोगों की भूमिका भी है, जिन्होंने इस यात्रा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। गुजरात इस कहानी का केवल दर्शक नहीं रहा, बल्कि इसकी यात्रा का सक्रिय भागीदार रहा है। जामनगर की औद्योगिक पहचान से लेकर भविष्य की ऊर्जा की योजनाओं तक, राज्य की भूमिका इस सफर में लगातार बनी हुई है।अब जब रिलायंस अपने अगले चरण की ओर बढ़ रहा है, गुजरात एक बार फिर इस कहानी में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लेकिन इस कहानी का सबसे नाटकीय अध्याय अभी बाकी था। उसकी शुरुआत किसी बोर्डरूम में नहीं, बल्कि अंबानी परिवार की अपनी भोजन की मेज पर हुई बातचीत से होने वाली थी।

अगली कड़ी में : एक बेटी की शिकायत, एक बेटे की दूरदृष्टि और परिवार के भीतर हुई वह बातचीत, जिसने भारत को जोड़ने वाली एक नई कहानी की शुरुआत की
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