

नई दिल्ली : भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 2047 तक बढ़कर 2,000 गीगावाट से अधिक हो सकती है, जो मौजूदा क्षमता के मुकाबले करीब चार गुना होगी। एनर्जी एंड क्लाइमेट इनिशिएटिव्स सोसायटी (ENCIS) की रिपोर्ट के अनुसार, इस विस्तार में स्वच्छ ऊर्जा, खासकर सौर ऊर्जा, की अहम भूमिका रहेगी। रिपोर्ट मंगलवार को ‘भारत इलेक्ट्रिसिटी, पावरजेन इंडिया एंड इंडियन यूटिलिटी वीक 2026’ के उद्घाटन सत्र में जारी की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश की सौर ऊर्जा क्षमता मौजूदा 119 गीगावाट से बढ़कर 2047 तक 1,100 गीगावाट से अधिक हो सकती है। भारत की कुल स्थापित क्षमता करीब 540 गीगावाट है, जिसमें गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत पहुंच चुकी है। यह लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल हुआ है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के चेयरपर्सन घनश्याम प्रसाद ने कहा कि बिजली क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और चुनौती केवल नई क्षमता जोड़ने की नहीं, बल्कि ऐसा मजबूत ग्रिड और बाजार ढांचा तैयार करने की है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और नई तकनीकों को बड़े पैमाने पर समाहित कर सके।
रिपोर्ट के अनुसार, बिजली की अधिकतम मांग 2032 तक 366 गीगावाट पहुंच सकती है। डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और हरित हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों से मांग बढ़ने की उम्मीद है। 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को करीब तीन गुना करने और 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की जरूरत होगी।
ऊर्जा भंडारण क्षमता को भी 2030 तक बढ़ाकर करीब 200 गीगावाट-घंटा करना होगा। रिपोर्ट ने बिजली क्षेत्र में बदलाव के लिए 2030 तक करीब 5,000 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख से अधिक कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता जताई है। साथ ही, ग्रिड की विश्वसनीयता और वितरण क्षेत्र में सुधार को महत्वपूर्ण चुनौती बताया गया है।