

नई दिल्ली : भारत के प्राथमिकता वाले 26 बाजारों में चावल का निर्यात नवंबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान पिछले तीन वर्षों के औसत से अधिक रहा। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय खान-पान के अनुरूप भारतीय चावल की विभिन्न किस्मों को बढ़ावा देने की रणनीति से विदेशों में मांग का आधार व्यापक हो रहा है।
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) द्वारा वाणिज्यिक आसूचना एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, इस पांच महीने की अवधि में इन 26 बाजारों को कुल 23,476 करोड़ रुपये मूल्य का 47.9 लाख टन चावल निर्यात किया गया। इसमें बासमती और गैर-बासमती दोनों किस्में शामिल हैं।
निर्यात मूल्य पिछले तीन वर्षों में नवंबर-मार्च की समान अवधि के औसत से 1.1 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि निर्यात मात्रा में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 26 बाजारों में से 11 में मूल्य और मात्रा, दोनों के लिहाज से वृद्धि दर्ज की गई।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को भारतीय चावल का निर्यात मूल्य के लिहाज से 65 प्रतिशत और मात्रा के लिहाज से 64 प्रतिशत बढ़ा। बेल्जियम में निर्यात मूल्य 53.8 प्रतिशत और मात्रा 44.5 प्रतिशत बढ़ी।
जर्मनी को निर्यात मूल्य में 33.5 प्रतिशत और मात्रा में 24.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ब्रिटेन में क्रमशः 26.9 प्रतिशत और 25.6 प्रतिशत, जबकि दक्षिण अफ्रीका में मूल्य 26 प्रतिशत और मात्रा 42.9 प्रतिशत बढ़ी।
केन्या को निर्यात मूल्य 22.3 प्रतिशत और मात्रा 34.1 प्रतिशत बढ़ी। फ्रांस में क्रमशः 31.3 प्रतिशत और 32.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मैक्सिको को चावल का निर्यात मात्रा के लिहाज से 50.9 प्रतिशत और मूल्य के लिहाज से 22.1 प्रतिशत बढ़ा। नीदरलैंड में मूल्य 20.5 प्रतिशत और मात्रा 13.8 प्रतिशत, जबकि कनाडा में क्रमशः 10.2 प्रतिशत और 9.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सेनेगल को निर्यात मूल्य 5.3 प्रतिशत और मात्रा 29.9 प्रतिशत बढ़ी।
व्यापार आंकड़ों से पता चलता है कि निर्यात वृद्धि का आकलन केवल मात्रा के आधार पर नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, मैक्सिको को चावल के निर्यात की मात्रा 50.9 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन उसका मूल्य 22.1 प्रतिशत ही बढ़ा। इसी तरह केन्या और दक्षिण अफ्रीका में भी मात्रा की वृद्धि मूल्य की तुलना में अधिक रही।
यह अंतर अलग-अलग बाजारों में कीमतों, उत्पाद मिश्रण और उपभोक्ता मांग में बदलाव को दर्शाता है। ऐसे में भारतीय निर्यातक अब चावल को केवल एक जिंस के रूप में बेचने के बजाय स्थानीय व्यंजनों और उपभोक्ता जरूरतों के अनुरूप विभिन्न किस्मों की उपयोगिता पर जोर दे रहे हैं।
भारत में चावल की पर्याप्त घरेलू उपलब्धता के बीच निर्यात आधार को व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है। उद्योग का जोर केवल अधिक मात्रा में चावल निर्यात करने के बजाय ऐसी विशिष्ट किस्मों की पहचान पर है, जो स्वाद, गुणवत्ता, पकने के गुण और स्थानीय खान-पान के अनुरूप होने के कारण विभिन्न देशों में प्रतिस्पर्धी बन सकें।
इस रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए 23 से 25 अक्टूबर तक नयी दिल्ली के भारत मंडपम में भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026 का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन में भारतीय चावल की विभिन्न किस्मों के लिए नए बाजार तलाशने और निर्यात को और व्यापक बनाने पर जोर रहने की उम्मीद है।