भारत को अमेरिकी समझौते की नकल के बजाय अपना एआई सुरक्षा ढांचा बनाना चाहिए: उद्योग विशेषज्ञ

अमेरिकी मॉडल की नकल के बजाय भारत को एआई सुरक्षा में अपनी राह चुननी चाहिए
हालांकि, केवल स्वैच्छिक उपाय पर्याप्त होंगे या नहीं, इसपर सबकी राय अलग-अलग है।
भारत को अमेरिकी समझौते की नकल के बजाय अपना एआई सुरक्षा ढांचा बनाना चाहिए: उद्योग विशेषज्ञ
Published on: 

नई दिल्ली : भारत को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच पिछले सप्ताह हुए स्वैच्छिक समझौते की नकल करने के बजाय अपनी भाषाओं, बड़े पैमाने और अनुप्रयोग आधारित कृत्रिम मेधा (एआई) परिवेश के अनुरूप अपना एआई सुरक्षा ढांचा तैयार करना चाहिए। उद्योग विशेषज्ञों ने यह राय जताई है।

विशेषज्ञों ने 'डीपफेक' और साइबर हमलों जैसे जोखिमों से निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों को साथ लाने वाली प्रतिबद्धता की भी जरूरत बताई। हालांकि, केवल स्वैच्छिक उपाय पर्याप्त होंगे या नहीं, इसपर सबकी राय अलग-अलग है।

इन विशेषज्ञों की राय 29 सितंबर को ट्रंप और गूगल, ओपनएआई, एंथ्रोपिक, मेटा, एनवीडिया तथा एलन मस्क की एक्सएआई जैसी प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित ‘व्हाइट हाउस एकॉर्ड ऑन सुपर इंटेलिजेंस’ के बाद सामने आई है। यह स्वैच्छिक एआई सुरक्षा समझौता है।

समझौते के तहत कंपनियों ने अपने एआई मॉडल की निगरानी के लिए आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था, विशेष निगरानी दल, स्वतंत्र बाहरी ऑडिट और निदेशक मंडल के स्तर पर निगरानी की व्यवस्था करने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने सुरक्षा मानक तय करने के लिए नियमित बैठकें करने पर भी सहमति जताई है।

नैसकॉम के चेयरमैन और फ्रैक्टल समूह के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) श्रीकांत वेलामाकन्नी ने कहा कि भारत को अमेरिका के मॉडल की सीधी नकल नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय, उसे घरेलू स्तर की प्रतिबद्धता को एआई सुरक्षा पर वैश्विक समझ विकसित करने की दिशा में आधार बनाना चाहिए।

वेलामाकन्नी ने कहा, ‘जैसे-जैसे मॉडल अधिक सक्षम और स्वायत्त होते जा रहे हैं, हम उन्हें प्रणालियों तक अधिक पहुंच और फैसले लेने की अधिक स्वायत्तता दे रहे हैं। विनाशकारी जोखिमों को रोकने के लिए एआई सुरक्षा को काफी मजबूत करना होगा और इसे एआई की क्षमता से आगे रहना होगा।’

उन्होंने कहा कि अमेरिका का समझौता मुख्य रूप से अग्रणी एआई कंपनियों के स्व-नियमन को बढ़ावा देता है। इसके विपरीत, यूरोपीय संघ ने जोखिम आधारित बाध्यकारी व्यवस्था अपनाई है, जबकि चीन सरकारी नियंत्रण मॉडल का पालन करता है।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के प्रधान विश्लेषक सुमेन मंडल ने कहा, ‘भारत को अमेरिका के मॉडल की नकल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन वह उससे प्रेरणा लेकर भरोसेमंद एआई परिवेश तैयार करने के प्रयासों में तेजी ला सकता है।’

उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतिबद्धता में एआई प्रणालियों को इस्तेमाल में लाने से पहले उनका परीक्षण, स्वतंत्र ऑडिट, गंभीर समस्याओं की रिपोर्टिंग और एआई से जुड़े जोखिमों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान जैसे प्रावधान होने चाहिए।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in