कंपनियों पर बढ़ रहा है लागत का दबाव

कच्चे तेल, एलएनजी और माल ढुलाई लागत में एक साथ बढ़ोतरी हो रही है
कंपनियों पर बढ़ रहा है लागत का दबाव
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नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण ईंधन की लागत बढ़ रही है, जिससे भारत सहित वैश्विक इस्पात उद्योग को आने वाले दिनों में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कच्चे तेल, एलएनजी और माल ढुलाई लागत में एक साथ बढ़ोतरी हो रही है, जिससे लागत का दबाव सीधे इस्पात और इस्पात से संबंधित जिंस बाजारों पर पड़ रहा है।

कितनी बढ़ गयी है कीमत : युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमतें औसतन 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। आने वाले दिनों में लागत में वृद्धि जारी रहेगी। युद्ध ने माल ढुलाई लागत को भी प्रभावित किया है, जिसमें हाल के समय में लगभग 40 प्रतिशत का उछाल आया है।

लागत में वृद्धि : उद्योग को लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ेगा। कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालेंगी और अगर बाजार इस लागत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, तो इस्पात की मांग भी प्रभावित हो सकती है।

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