GST रिटर्न फॉर्म का मसौदा 1 नवंबर को जारी होगा

GST रिटर्न फॉर्म का मसौदा 1 नवंबर को जारी होगा
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माल एवं सेवा कर (GST) के तहत विसंगतियों संबंधी नोटिस को कम करने के प्रयास के तहत वित्त मंत्रालय 1 नवंबर को संशोधित GST रिटर्न फॉर्म का मसौदा परामर्श के लिए माईगॉव.इन मंच पर रखेगा। इनमें GSTR-1 भी शामिल है, जिसमें कारोबारियों को अपनी बाहरी आपूर्ति का ब्योरा देना होता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। केंद्र एवं राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली GST परिषद ने 8 अक्टूबर को अपनी 57वीं बैठक में GSTR-1/1ए/आईएफएफ फॉर्म के मसौदे को मंजूरी दी थी। संशोधित फॉर्म 1 अप्रैल, 2027 से लागू होंगे। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) इन फॉर्म को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए पोर्टल पर रखेगा। इस परामर्श प्रक्रिया में 30 नवंबर तक टिप्पणियां दी जा सकेंगी।

सीबीआईसी के GST नीति प्रभाग के आयुक्त गौरव सिंह ने कहा कि फिलहाल माल एवं सेवा कर में एक बड़ी समस्या रिटर्न (कर वापसी) के ब्योरे में विसंगति है और करीब 80 प्रतिशत नोटिस ऐसी विसंगतियों के कारण जारी किए जाते हैं। कारोबारी वर्तमान में GSTR-3बी में बदलाव या संशोधन कर सकते हैं। यह स्व-घोषित सारांश रिटर्न और मासिक कर भुगतान फॉर्म हैं। इससे GSTR-1 के साथ ब्योरे में विसंगति पैदा होती है। सिंह ने बताया कि कारोबारी GSTR-3बी में बदलाव क्यों करते हैं। इस बारे में उद्योग जगत से मिले जवाबों के आधार पर GST फॉर्म में बदलाव किए गए हैं और इनवॉइस प्रबंधन प्रणाली (आईएमएस) को बेहतर बनाया गया है। उन्होंने कहा, ‘उद्योग जगत से मिले जवाबों के आधार पर हम GSTR-1 फॉर्म में बदलाव कर रहे हैं और आईएमएस को बेहतर बना रहे हैं, ताकि GSTR-3बी में संशोधन की जरूरत न पड़े। अगर इसकी जरूरत नहीं होगी, तो ब्योरे में विसंगति के आधार पर नोटिस जारी करने का कोई मामला नहीं बनेगा। हम एक नवंबर को टिप्पणियों के लिए फॉर्म ‘एमआईजीओवी’ पर रखेंगे और इसके लिए 30 दिन का समय देंगे।’ सिंह ने कहा कि यदि GST रिटर्न प्रणाली में सुधारों को सफलतापूर्वक लागू किया जा सका, तो आपूर्ति शृंखला में पारदर्शिता और सटीकता से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाएंगी। यह आगे के सुधारों की नींव बनेगा। इनवॉइस प्रस्तुत करने की सुविधा (आईएफएफ), GST की तिमाही रिटर्न मासिक भुगतान योजना के तहत करदाताओं द्वारा दाखिल किया जाने वाला एक वैकल्पिक मासिक विवरण है। GSTR-1 बिक्री का मासिक ‘इनवॉइस या बिल आधारित रिटर्न’ है, जबकि GSTR-1ए एक संशोधन विवरण है, जो करदाताओं को अपना मासिक GSTR-3बी रिटर्न दाखिल करने से पहले गलतियों को सुधारने या छूटे हुए बिलों का ब्योरा जोड़ने की अनुमति देता है। GST परिषद ने आठ अक्टूबर को GST रिटर्न में कर देनदारियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दावों में संशोधन के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य ब्योरे में विसंगतियों को कम करना और नोटिस/सूचनाएं जारी करने की संख्या घटाना है। परिषद ने GST फॉर्म GSTR-1/1ए/आईएफएफ में सुधारों को मंजूरी दी थी, ताकि इन फॉर्म में दिए गए ब्योरे का मासिक कर भुगतान फॉर्म GSTR-3बी में दर्ज ब्योरे के साथ बेहतर मिलान किया जा सके। परिषद ने रिटर्न में देनदारी की सही जानकारी देने और उसमें सुधार/संशोधन की व्यवस्था को भी मंजूरी दी, ताकि GSTR-3बी में दर्ज कर देनदारी, GSTR-1/1ए/आईएफएफ में दी गई देनदारी के ब्योरे के अनुरूप हो। इसके अलावा, परिषद ने GST डीआरसी-03 फॉर्म में बदलावों को मंजूरी दी। इस फॉर्म में उन चालान का ब्योरा घोषित किया जाता है, जिनके लिए भुगतान किया गया है। परिषद ने सीGST नियम, 2017 के नियम 60 में उप-नियम (6ए) जोड़ने को मंजूरी दी। इसके तहत आईएमएस में प्राप्तकर्ता को आवक आपूर्ति से संबंधित किसी दस्तावेज को स्वीकार करने, अस्वीकार करने या लंबित रखने की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य GSTR-2बी फॉर्म में आईटीसी का विवरण तैयार करना है। GSTR-2बी प्रणाली द्वारा तैयार किया जाने वाला ऐसा विवरण है, जिसमें उपलब्ध कर ‘क्रेडिट’ की जानकारी होती है। परिषद ने रिटर्न में आईटीसी की सही जानकारी देने और उसमें सुधार/संशोधन की व्यवस्था को भी मंजूरी दी, ताकि GSTR-3बी में दावे वाले आईटीसी, GSTR-2बी में उपलब्ध कराए गए आईटीसी के ब्योरे के अनुरूप हो। परिषद ने सीGST नियमों में नियम 86डी जोड़ने को भी मंजूरी दी, जिसके तहत ‘रिवर्स चार्ज’ के आधार पर चुकाए गए कर और दावे वाले आईटीसी का इलेक्ट्रॉनिक विवरण दाखिल करने का प्रावधान होगा।

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