छोटे कारोबारियों पर भारी पड़ रही GST अनुपालन लागत

GST पंजीकरण से कारोबारियों को बड़े सप्लाई चेन का हिस्सा बनने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने की सुविधा मिलती है।
छोटे कारोबारियों पर भारी पड़ रही GST अनुपालन लागत
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नई दिल्ली : जीएसटी व्यवस्था में अनुपालन की लागत असंगठित क्षेत्र के छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) के एक अध्ययन के मुताबिक, असंगठित क्षेत्र के उद्यमों की GST अनुपालन लागत सालाना कारोबार (टर्नओवर) के 3.28% से 13.90% तक और औसत वार्षिक परिचालन खर्च के 4.64% से 19.71% तक हो सकती है। यह विश्लेषण NSSO के 2022-23 के अनइन्कॉरपोरेटेड सेक्टर एंटरप्राइजेज सर्वे पर आधारित है।

Sacchidananda Mukherjee और Shivani Badola के अध्ययन के अनुसार, असंगठित क्षेत्र में आमतौर पर छोटे, मालिक द्वारा संचालित कारोबार आते हैं, जो कंपनियों के बजाय प्रोपराइटरशिप या पार्टनरशिप के रूप में काम करते हैं। अध्ययन ने कहा कि ऊंची अनुपालन लागत इन उद्यमों को अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में शामिल होने से हतोत्साहित कर सकती है।

सर्वे के नमूने में केवल 2.41% उद्यम GST या VAT के तहत पंजीकृत थे। GST पंजीकरण से कारोबारियों को बड़े सप्लाई चेन का हिस्सा बनने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने की सुविधा मिलती है। इसके बावजूद पंजीकरण को लेकर छोटे उद्यमों में झिझक बनी हुई है।

अध्ययन के मुताबिक, GST के तहत कई आवधिक रिटर्न दाखिल करना, इनपुट टैक्स क्रेडिट का सिस्टम-जनरेटेड स्टेटमेंट से मिलान, ई-वे बिल और ई-इनवॉइस की जरूरत तथा विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखना कारोबारियों पर अनुपालन का अतिरिक्त बोझ डालता है।

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि लागत का असर छोटे कारोबारियों पर अपेक्षाकृत ज्यादा है। 4.9 लाख रुपये से कम सालाना टर्नओवर वाले उद्यमों पर अनुपालन लागत अधिक होने की संभावना है। यह अध्ययन ऐसे समय आया है जब GST परिषद 7 अक्टूबर को प्रक्रिया सुधारों पर चर्चा करने वाली है। बैठक में आसान और तेज पंजीकरण, सरल रिटर्न दाखिल करने के साथ अटके ITC और रिफंड से जुड़े मुद्दों पर भी विचार होने की उम्मीद है।

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