

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा से डीपफेक के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक, मेटा के साथ हुई बैठकों के नतीजों की समीक्षा के बाद सरकार आगे की कार्रवाई को लेकर कानूनी राय लेगी।
सूत्रों ने बताया कि सरकार मुख्य रूप से यह जांच कर रही है कि मेटा भारतीय कानून के तहत सोशल मीडिया ‘मध्यस्थ’ के लिए निर्धारित प्रावधानों का पालन कर रहा है या नहीं। सरकार अन्य ऑनलाइन मंचों को भी चर्चा के लिए बुलाएगी और यह जांच करेगी कि वे भारतीय कानून में मध्यस्थ की परिभाषा के दायरे में आते हैं या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, यदि कोई मंच अपनी अनुशंसा प्रणाली के जरिए यह तय करता है कि उपयोगकर्ताओं को कौन-सी सामग्री दिखाई जाए या भुगतान वाली सामग्री को बढ़ावा देता है, तो उसके मध्यस्थ के दर्जे को लेकर सवाल उठ सकते हैं। सरकार का मानना है कि ऐसी स्थिति में मंचों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
सरकार और मेटा के बीच तीन दिन तक हुई बैठकों में डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और बिना लेबल वाली एआई-जनित सामग्री से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार ने कंपनी से इनसे निपटने के लिए अपनी कार्ययोजना स्पष्ट करने को कहा।
बैठकें उस घटना के बाद हुईं, जब मेटा के एआई आधारित कंटेंट फिल्टर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी। कंपनी ने इसे तकनीकी गलती बताते हुए पोस्ट बहाल कर दी थी और माफी मांगी थी।