

नई दिल्ली : सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता-2027 (सीएएफई-3) मानदंड अधिसूचित कर दिए हैं। ये नियम 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे और वाहन कंपनियों के लिए ईंधन दक्षता तथा कार्बन उत्सर्जन के क्रमिक रूप से कड़े लक्ष्य तय करेंगे।
नए मानदंड मुख्य रूप से यात्री कारों पर लागू होंगे, जिनमें हैचबैक, सेडान, एसयूवी और एमपीवी शामिल हैं। इनमें चालक के अलावा अधिकतम आठ यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। नियम भारत में बिक्री के लिए निर्मित और आयात किए जाने वाले नए यात्री वाहनों पर लागू होंगे।
नए सीएएफई-3 में वाहन के वजन के आधार पर लक्ष्य तय करने की व्यवस्था को अधिक संतुलित किया गया है। मौजूदा 1,082 किलोग्राम के संदर्भ वजन को बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम किया गया है, यानी करीब 13.6 प्रतिशत की वृद्धि। वहीं, मसौदे में 909 किलोग्राम से कम वजन वाली पेट्रोल कारों के लिए प्रस्तावित रियायत को अंतिम नियमों में हटा दिया गया है।
सरकार ने 2027-28 में ईंधन खपत का मानक 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से घटाकर 2031-32 में 3.3273 लीटर कर दिया है। यानी पांच साल में करीब 16.7 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य है।
स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV), रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहन (REEV), प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV), मजबूत हाइब्रिड (SHEV) और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ‘सुपर क्रेडिट’ दिए जाएंगे। इससे कंपनियों को अपने बेड़े के औसत उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
नियमों में ‘क्रेडिट-डेबिट’ व्यवस्था भी है। लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां क्रेडिट जमा कर सकेंगी और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल या अन्य कंपनियों को बेच सकेंगी। कमी वाली कंपनियां पिछले क्रेडिट, दूसरे निर्माताओं से खरीद या ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की खरीद व्यवस्था के जरिये लक्ष्य पूरा कर सकेंगी।
सरकार के अनुसार, नया ढांचा विद्युतीकरण, वैकल्पिक ईंधन और नई तकनीकों के साथ भारत के ऊर्जा सुरक्षा एवं टिकाऊ परिवहन लक्ष्यों को समर्थन देगा।