सरकार अमेरिकी शुल्क प्रभावों का आकलन करने के लिए कर रही काम

सरकार अमेरिकी शुल्क प्रभावों का आकलन करने के लिए कर रही काम
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नयी दिल्ली: वाणिज्य मंत्रालय दो अप्रैल को अमेरिकी प्रशासन के भारत सहित अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर लगाए जाने वाले जवाबी शुल्कों के संभावित नतीजों का आकलन करने के लिए विभिन्न परिदृश्यों पर काम कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दो अप्रैल ‘मुक्ति दिवस’ होगा क्योंकि वह अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने और देश के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुल्क दरों की घोषणा करने की योजना बना रहे हैं। भारत और अमेरिका व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी काम कर रहे हैं।

क्या है स्थिति: घरेलू उद्योग और निर्यातकों ने भारत के निर्यात पर अमेरिका के जवाबी शुल्क के संभावित प्रभाव पर चिंता जताई है। इसका कारण शुल्क वैश्विक बाजारों में वस्तुओं को प्रतिस्पर्धा से बाहर कर सकते हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। सूत्रों ने कहा कि इन शुल्कों का प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों पर अलग-अलग हो सकता है। मंत्रालय अलग-अलग परिदृश्य तैयार कर रहा है। ये परिदृश्य घरेलू कंपनियों को इन शुल्कों से निपटने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि अभी भी यह अनिश्चित है कि अमेरिका शुल्कों की मात्रा और तरीके को किस प्रकार लागू करने की योजना बना रहा है।

वर्तमान में, अमेरिकी वस्तुओं पर भारत में 7.7 प्रतिशत का भारांश औसत शुल्क लगता है, जबकि अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर केवल 2.8 प्रतिशत शुल्क लगता है। यानी इसमें 4.9 प्रतिशत का अंतर है। अमेरिका को भारतीय कृषि निर्यात पर वर्तमान में 5.3 प्रतिशत शुल्क लगता है, जबकि भारत को अमेरिकी कृषि निर्यात पर 37.7 प्रतिशत शुल्क लगता है। यानी इसमें 32.4 प्रतिशत का अंतर है। व्यापार विशेषज्ञों ने कहा कि क्षेत्र स्तर पर, भारत और अमेरिका के बीच संभावित शुल्क अंतर विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग हैं। रसायन और औषधि क्षेत्र के लिए यह अंतर 8.6 प्रतिशत, प्लास्टिक के लिए 5.6 प्रतिशत, वस्त्र और परिधान के लिए 1.4 प्रतिशत, हीरे, सोने और आभूषणों के लिए 13.3 प्रतिशत, लोहा, इस्पात और ‘बेस मेटल’ के लिए 2.5 प्रतिशत, मशीनरी और कंप्यूटर के लिए 5.3 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए 7.2 प्रतिशत तथा वाहन और वाहन कल-पुर्जों के लिए 23.1 प्रतिशत है।

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