सरकार ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 6% हिस्सेदारी बिक्री शुरू की, 2,492 करोड़ जुटाने का लक्ष्य

ओएफएस के जरिए सरकारी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंड पूरा करने की दिशा में कदम
सरकार ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 6% हिस्सेदारी बिक्री शुरू की, 2,492 करोड़ जुटाने का लक्ष्य
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नई दिल्ली: बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम) की बिक्री पेशकश (ओएफएस) गैर-खुदरा निवेशकों के लिए 54 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर मंगलवार को शुरू हुई। न्यूनतम मूल्य पर सरकार इस सरकारी बैंक में अपनी छह प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर लगभग 2,492 करोड़ रुपये जुटाएगी।

शेयर बिक्री के विवरण-पत्र के अनुसार, ओएफएस बुधवार को खुदरा निवेशकों के लिए खुलेगा।बैंक ऑफ महाराष्ट्र के ओएफएस के लिए न्यूनतम मूल्य 54 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है, जो बीएसई पर सोमवार के बंद भाव 57.66 रुपये प्रति शेयर से 6.34 प्रतिशत कम है।

एक प्रतिशत हिस्सेदारी ‘ग्रीन-शू’ विकल्प के तहत उपलब्ध

आधार प्रस्ताव में 38,45,77,748 शेयर शामिल हैं, जो बैंक की चुकता शेयर पूंजी का पांच प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त 7,69,15,549 शेयर या एक प्रतिशत हिस्सेदारी ‘ग्रीन-शू’ विकल्प के तहत उपलब्ध है। इससे इसका कुल आकार 46.14 करोड़ शेयर या छह प्रतिशत हिस्सेदारी बैठता है।

वर्तमान में सरकार के पास 79.60 प्रतिशत हिस्सेदारी

सरकार के पास पुणे स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में वर्तमान में 79.60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। हिस्सेदारी कम करने से बैंक 25 प्रतिशत की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंड को पूरा करने में सक्षम हो जाएगा, क्योंकि सरकारी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से कम हो जाएगी।

यह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा जारी प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) नियमों के अनुरूप है। इसके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों सहित सभी सूचीबद्ध इकाइयों में न्यूनतम 25 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता अनिवार्य है। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सीपीएसई और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को अगस्त 2026 तक छूट दी है।

इसके अलावा, सरकार की चार अन्य चार बैंकों... इंडियन ओवरसीज बैंक (94.6 प्रतिशत), पंजाब एंड सिंध बैंक (93.9 प्रतिशत), यूको बैंक (91 प्रतिशत) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (89.3 प्रतिशत)...में हिस्सेदारी न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता सीमा से अधिक है।

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