

अमेरिकी डॉलर में मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड के बीच बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक के मिनट्स पर है। इन मिनट्स से यह संकेत मिल सकता है कि फेड के अधिकारी आने वाले महीनों में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी के पक्ष में कितने हैं।
बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमत करीब 1.1 प्रतिशत गिरकर 4,119.01 डॉलर प्रति औंस रह गई। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी करीब 1 प्रतिशत गिरकर 4,145.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
सोने पर दबाव की बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर में तेजी रही। डॉलर मजबूत होने पर डॉलर में खरीदा जाने वाला सोना दूसरे देशों की मुद्राओं में खरीदने वाले निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है। इससे इसकी मांग पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी डॉलर सूचकांक में भी करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड में तेजी ने भी सोने की चमक को कम किया।
बाजार की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर में हुई बैठक के मिनट्स पर है। फेड ने सितंबर में ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। अब निवेशक यह समझना चाहते हैं कि केंद्रीय बैंक के भीतर आगे भी दरें बढ़ाने को लेकर कितनी सहमति है। हाल के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद बाजार में अक्टूबर में फिर ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद काफी कम हुई है। हालांकि, दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की संभावना अभी बनी हुई है। ऐसे में मिनट्स में अधिकारियों की टिप्पणियां सोने की आगे की दिशा तय करने में अहम हो सकती हैं। ब्याज दरें बढ़ने पर सोने पर आमतौर पर दबाव बढ़ता है, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता। इसके मुकाबले बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं।
तकनीकी तौर पर भी सोने के लिए 4,100 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल की गिरावट के बावजूद सोना इसी स्तर के आसपास टिकने की कोशिश कर रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो कीमतों पर और दबाव आ सकता है। दूसरी ओर, 4,200 डॉलर का स्तर फिलहाल सोने के लिए अहम प्रतिरोध बना हुआ है। बाजार की दिशा डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड की आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेतों पर निर्भर करेगी।
हालांकि, सोने में गिरावट के बावजूद इसकी लंबी अवधि की मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, सरकारी कर्ज और महंगाई से जुड़ी चिंताएं अब भी सोने को समर्थन दे रही हैं। चीन के केंद्रीय बैंक ने सितंबर में भी अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी की। इसके साथ चीन की लगातार 23वें महीने सोना खरीदने की प्रक्रिया जारी रही है। केंद्रीय बैंकों की खरीद को सोने की कीमतों के लिए लंबी अवधि का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
सोने के साथ दूसरी कीमती धातुओं में भी दबाव देखा गया। चांदी की कीमत करीब 2.6 प्रतिशत गिरकर 60.10 डॉलर प्रति औंस रही। प्लैटिनम में करीब 3.9 प्रतिशत और पैलेडियम में 2.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल निवेशकों का ध्यान फेड के मिनट्स पर है। इनमें अगर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख का संकेत मिलता है तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी सोने पर और दबाव डाल सकती है। वहीं, दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावना कमजोर पड़ने पर सोने को फिर से सहारा मिल सकता है।