

नयी दिल्ली : आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि अगले वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति के चिंता का विषय बनने की आशंका नहीं है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में लगातार मांग के कारण कीमती धातुओं - सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि जारी रहने के आसार हैं। आपूर्ति पक्ष की अनुकूल परिस्थितियों और जीएसटी दरों के युक्तिकरण के क्रमिक लाभ के कारण महंगाई का परिदृश्य नरम बना हुआ है। भविष्य की बात करें तो, मजबूत कृषि उत्पादन, स्थिर वैश्विक जिंस कीमतों और निरंतर नीतिगत सतर्कता से महंगाई के लक्षित दायरे में रहने का अनुमान है। यह एक अनुकूल संकेत है। हालांकि, विनिमय दर के उतार-चढ़ाव, मूल धातुओं की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं। इन स्थितियों पर लगातार निगरानी और समय के अनुसार नीतिगत प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता होगी।
क्या है स्थिति : जब तक स्थायी शांति स्थापित नहीं होती और व्यापारिक युद्ध सुलझ नहीं जाते, तब तक सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में सुरक्षित निवेश के रूप में इनकी मांग लगातार बनी हुई है।वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की मुद्रास्फीति दर वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में अधिक रह सकती है। हालांकि, इसके बावजूद महंगाई के चिंता का विषय बनने की आशंका नहीं है।
महंगाई का स्तर : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अगले वित्त वर्ष के लिए प्रमुख मुद्रास्फीति में वृद्धि का अनुमान लगाया है। इसके साथ ही महंगाई का स्तर चार प्रतिशत (दो प्रतिशत की घट-बढ़ के साथ) के लक्षित दायरे के भीतर रहने की उम्मीद है। आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.8 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026-27 में चार प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर का अनुमान लगाया है। आरबीआई के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए मुद्रास्फीति क्रमशः 3.9 और चार प्रतिशत रह सकती है।