दुनिया की भारत में दिलचस्पी पहले कभी इतनी नहीं रही, मौके का फायदा उठाने के लिए प्रतिस्पर्धी बनना जरूरी: T.V. नरेंद्रन

तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण कई कौशल और बिजनेस मॉडल भी जल्दी अप्रासंगिक हो सकते हैं।
दुनिया की भारत में दिलचस्पी पहले कभी इतनी नहीं रही, मौके का फायदा उठाने के लिए प्रतिस्पर्धी बनना जरूरी: टी.वी. नरेंद्रन
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नई दिल्ली : टाटा स्टील लिमिटेड के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर तथा ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के अध्यक्ष टी.वी. नरेंद्रन ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर भारत में दिलचस्पी पहले कभी इतनी अधिक नहीं रही। उन्होंने कहा कि दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव भारत के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं, लेकिन इनका लाभ उठाने के लिए देश को अपनी क्षमताएं और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ानी होगी। वह AIMA के नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन 2026 की प्लेटिनम जुबली को संबोधित कर रहे थे।

नरेंद्रन के मुताबिक, भारत को अब केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग बेस, टेक्नोलॉजी और प्रतिभा के स्रोत तथा रणनीतिक साझेदार के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने ‘ग्रोथ विद रेजिलिएंस’ विषय पर बोलते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में टैरिफ और व्यापार बाधाओं के कारण बदलाव हो रहे हैं। व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा और सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ रहा है।

तकनीक में बदलाव से बिजनेस मॉडल हो सकते हैं अप्रासंगिक

उन्होंने कहा कि जलवायु संबंधी घटनाओं का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है और भू-राजनीतिक घटनाक्रम कंपनियों की वर्षों से तैयार कारोबारी योजनाओं को बदल सकते हैं। तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण कई कौशल और बिजनेस मॉडल भी जल्दी अप्रासंगिक हो सकते हैं।

पश्चिम एशिया संघर्ष का उदाहरण देते हुए नरेंद्रन ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले शिपिंग मार्ग प्रभावित होने से ऊर्जा लागत, माल ढुलाई दरों और बीमा प्रीमियम में वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर भारत में कारोबार करने की लागत पर पड़ता है। नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ भी जोखिमों के लिए बेहतर तैयारी की जरूरत को दर्शाती है।

निवेश में 11.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी

इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इस दौरान निवेश में 11.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और मैन्युफैक्चरिंग तथा सेवा क्षेत्र का मजबूत योगदान रहा।

नरेंद्रन ने कहा कि कंपनियों को अब केवल दक्षता पर नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की मजबूती और संकट के समय विकल्प तलाशने की क्षमता पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने भारत के लिए डिजाइन, इंजीनियरिंग, बौद्धिक संपदा और तकनीकी प्रतिभा विकसित करने को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, किसी उत्पाद को असेंबल करने और उसका डिजाइन तथा इंजीनियरिंग करने में बड़ा अंतर है।

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