

तिरुवनंतपुरम : केरल का विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह मंगलवार से पूर्ण स्तर के निर्यात-आयात (EXIM) संचालन की शुरुआत के साथ नए चरण में प्रवेश करेगा। भारत के पहले गहरे पानी वाले कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के रूप में विकसित विझिंजम अब वैश्विक व्यापार के लिए केरल का प्रमुख समुद्री द्वार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन सुबह 10:45 बजे पहले निर्यात कंटेनर को रवाना करेंगे। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।
अब तक विझिंजम का मुख्य जोर ट्रांसशिपमेंट पर रहा है। पूर्ण EXIM संचालन शुरू होने के बाद केरल के निर्यातकों को अपना माल कोलंबो, सिंगापुर या दुबई जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब के जरिए भेजने की जरूरत कम होगी। इससे समय और लॉजिस्टिक्स लागत घटने की उम्मीद है।
परीक्षण के दौरान विझिंजम से स्पेन के वालेंसिया भेजा गया पहला निर्यात कंटेनर इस क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है।
विझिंजम की प्राकृतिक गहराई 20 से 24 मीटर है, जिससे यहां बड़े कंटेनर जहाजों को संभालना संभव है। बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय ईस्ट-वेस्ट शिपिंग कॉरिडोर से करीब 10 समुद्री मील दूर है। इसका संचालन अदाणी पोर्ट्स कर रही है।
कृषि उत्पाद, मसाले, काजू, समुद्री उत्पाद, हथकरघा और कपड़ा क्षेत्र से जुड़े केरल के छोटे एवं मध्यम निर्यातकों को सीधी वैश्विक कनेक्टिविटी का विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
पूर्ण संचालन के साथ राज्य सरकार ‘मिशन समुद्र’ भी शुरू कर रही है। इसके तहत विझिंजम मैरीटाइम इकोनॉमिक रीजन विकसित किया जाएगा, जिसमें 8 औद्योगिक क्लस्टर और 3 नए शहर शामिल होंगे।
सरकार ने इसके लिए 400 करोड़ रुपये का कैटेलिटिक फंड रखा है। अधिकारियों का अनुमान है कि 2031 तक यह पहल निजी निवेश के जरिए सार्वजनिक निवेश से 10 गुना से अधिक आर्थिक गतिविधि पैदा कर सकती है।
बंदरगाह के विस्तार से वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और लॉजिस्टिक्स पार्कों की मांग बढ़ने की भी उम्मीद है। इससे तिरुवनंतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार तथा औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।