

नई दिल्ली : सरकार ने यात्री वाहनों की ईंधन दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के उद्देश्य से कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE-III) मानदंडों का मसौदा जारी कर दिया है। बिजली मंत्रालय ने इस पर 6 अगस्त 2026 तक उद्योग और आम लोगों से सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं।
वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में चरणबद्ध तरीके से कमी लाने के उद्देश्य से तैयार किए गए ये नए मानदंड मौजूदा CAFE-II मानदंडों की जगह लेंगे, जिनकी अवधि 31 मार्च 2027 को समाप्त हो रही है। नए मानदंड वित्त वर्ष 2027-28 से 2031-32 के दौरान भारत में निर्मित या आयातित एम-1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होंगे। इस श्रेणी में चालक समेत अधिकतम आठ सीटों वाले वाहन शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, मसौदा जल्द ही बिजली मंत्रालय और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। इच्छुक पक्ष ई-मेल या डाक के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।
सरकार ने ईंधन खपत के लक्ष्यों को चरणबद्ध तरीके से कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत औसत ईंधन खपत का लक्ष्य 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर (94.76 ग्राम CO₂/किमी) से घटाकर 2031-32 तक 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर (78.90 ग्राम CO₂/किमी) करने का प्रस्ताव है। नए मानदंडों के अनुपालन का आकलन दो चरणों में होगा। पहला चरण तीन वर्ष का और दूसरा चरण दो वर्ष का होगा। इससे वाहन निर्माताओं (OEMs) को भविष्य की योजना बनाने और अधिक ईंधन दक्ष मॉडल विकसित करने के लिए स्पष्ट नियामकीय ढांचा मिलेगा।
CAFE-III के तहत पहली बार एथेनॉल, जैव ईंधन और संपीड़ित जैव गैस (CBG) की कार्बन तटस्थता (Carbon Neutrality) को मान्यता दी जाएगी। अनुपालन का आकलन करते समय घोषित कार्बन उत्सर्जन में निर्धारित छूट दी जाएगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन (EV), हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए सुपर क्रेडिट का भी प्रस्ताव है। क्रेडिट-डेबिट प्रणाली के तहत कंपनियां एक वाहन श्रेणी में अतिरिक्त प्रदर्शन का लाभ दूसरी श्रेणी में लक्ष्य पूरा करने के लिए इस्तेमाल कर सकेंगी।
मौजूदा एथेनॉल मिश्रण स्तर के लिए 8% कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर (CNF) माना जाएगा, जबकि सीबीजी और अन्य जैव ईंधनों के लिए यह लाभ वास्तविक मिश्रण स्तर के आधार पर तय होगा। इसके अलावा, स्वीकृत ईंधन-बचत तकनीकों को अपनाने पर वाहन निर्माता अधिकतम 9 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर तक का अनुपालन लाभ ले सकेंगे। हालांकि, किसी एक तकनीक के लिए यह लाभ 1 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर तक सीमित रहेगा।
सरकार ने प्रत्येक अनुपालन क्रेडिट की शुरुआती कीमत 2,500 रुपये तय करने का प्रस्ताव रखा है, जो हर वर्ष 500 रुपये बढ़ेगी। अनुपयोगी क्रेडिट निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद अमान्य हो जाएंगे।
जो वाहन निर्माता तय मानदंडों को पूरा नहीं कर पाएंगे, उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, जुर्माने की राशि का अभी खुलासा नहीं किया गया है। वहीं, सालाना 1,000 से कम वाहन बेचने वाले निर्माताओं को इन नियमों से छूट मिलेगी।