FPI ने 22,530 करोड़ रुपये निकाले

विशेषज्ञों ने निकासी के लिए वैश्विक और घरेलू कारकों को जिम्मेदार ठहराया
रुपये
रुपये
Published on

नयी दिल्ली : विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के बीच इस महीने अब तक भारतीय शेयरों से 22,530 करोड़ रुपये से अधिक निकाले हैं। यह निकासी 2025 में दर्ज की गई 1.66 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली के बाद हुई। ऐसा मुद्रा की अस्थिरता, वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी शुल्क में बढ़ोतरी की आशंका तथा बाजार के ऊंचे मूल्यांकन के कारण हुआ। FPI के लगातार बिकवाली के दबाव ने 2025 के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार FPI ने एक से 16 जनवरी के बीच भारतीय इक्विटी से 22,530 करोड़ रुपये निकाले। बाजार विशेषज्ञों ने इस निकासी के लिए वैश्विक और घरेलू कारकों को जिम्मेदार ठहराया है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ : सेंट्रिसिटी वेल्थटेक के इक्विटी प्रमुख और संस्थापक पार्टनर सचिन जसुजा ने कहा, बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और मजबूत डॉलर ने विकसित बाजारों में जोखिम समायोजित प्रतिफल में सुधार किया है। ऐसे में उभरते बाजारों से पूंजी निकलकर दूसरे बाजारों की ओर जा रही है।

डॉलर की मजबूती : मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रधान प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि बढ़े हुए अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर की मजबूती ने अमेरिकी संपत्तियों को तुलनात्मक रूप से अधिक आकर्षक बना दिया है। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक और व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं उभरते बाजारों के प्रति निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in