

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का उद्देश्य हर फिनटेक कंपनी को बैंक जैसा बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण वित्तीय गतिविधियां करने वाली संस्थाएं उनसे पैदा होने वाले जोखिमों का उचित प्रबंधन करें। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि समान गतिविधियों से समान जोखिम पैदा होने की स्थिति में, जहां उचित हो, उन पर समान नियामकीय व्यवस्था लागू होनी चाहिए। मुर्मू ने बताया कि आरबीआई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से मिले उस प्रस्ताव पर फीडबैक की समीक्षा कर रहा है, जिसके तहत एनबीएफसी को पूर्व निर्धारित पुनर्भुगतान कार्यक्रम वाले टर्म लोन ही देने की अनुमति होगी। इससे फ्लेक्सी-क्रेडिट जैसे उत्पाद प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें ग्राहक एक ही क्रेडिट सीमा को बार-बार इस्तेमाल और चुकता कर सकते हैं।
मुर्मू ने माना कि नियमन से कुछ फिनटेक कंपनियों के अल्पकालिक राजस्व मॉडल प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक और टिकाऊ वृद्धि के लिए अनुपालन जरूरी है। मजबूत गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, जिम्मेदार डेटा प्रबंधन और ग्राहक संरक्षण भविष्य में भारतीय फिनटेक कंपनियों की प्रतिस्पर्धी ताकत बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नियमन और नवाचार को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल केवल ऋण प्रक्रिया तेज करने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर ऋण उपलब्ध कराने के लिए होना चाहिए। साझेदारी मॉडल में भी अंतिम जवाबदेही विनियमित संस्था की ही रहेगी।
मुर्मू ने एआई आधारित ऋण निर्णयों में मानवीय जवाबदेही पर जोर देते हुए कहा कि एल्गोरिदम पक्षपातपूर्ण या गलत आर्थिक परिणाम दे सकते हैं। एजेंटिक एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह भी तय करना होगा कि मशीन द्वारा गलत निर्णय लेने पर जिम्मेदार कौन होगा।
उन्होंने डिजिटल भुगतान के बढ़ते पैमाने को देखते हुए सिस्टम में बैकअप, कारोबार निरंतरता, घटना प्रतिक्रिया और रिकवरी की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई। साथ ही धोखाधड़ी को बैंक, फिनटेक, भुगतान कंपनियों, दूरसंचार क्षेत्र और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साझा समस्या बताया।
मुर्मू ने वित्तीय समावेशन को डिजाइन का हिस्सा बनाने और भारतीय भुगतान प्रणालियों को क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित खतरे से बचाने के लिए ‘क्वांटम-प्रूफ’ तकनीक की दिशा में काम शुरू करने का भी आह्वान किया।