डीआरडीओ ने AEW & C मार्क-2 कार्यक्रम के लिए AIESL और अदाणी डिफेंस के साथ किए समझौते

एईडब्ल्यू एंड सी मार्क-2 कार्यक्रम के तहत हुए इन समझौतों से भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की निगरानी, कमान और नियंत्रण क्षमता में बड़ा इजाफा, आसमान से दुश्मन पर पैनी नजर रखने की ताकत होगी और मजबूत
छह ए321 विमानों को सैन्य उपयोग के लिए बदला जाएगा
AEW & C मार्क-2 कार्यक्रम के लिए DRDO का एआईईएसएल और अदाणी डिफेंस के साथ MoU
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नई दिल्ली : देश की हवाई निगरानी और रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार को एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्ल्यू एंड सी) मार्क-2 कार्यक्रम के तहत दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की निगरानी, कमान और नियंत्रण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगी।

छह ए321 विमानों को सैन्य उपयोग के लिए बदला जाएगा

पहला समझौता एआई इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (एआईईएसएल) के साथ किया गया है। इसके तहत छह ए321 यात्री विमानों को सैन्य उपयोग के अनुरूप परिवर्तित किया जाएगा। इनमें विशेष उपकरण और अत्याधुनिक मिशन प्रणालियां लगाकर इन्हें एईडब्ल्यू एंड सी मार्क-2 विमान के रूप में विकसित किया जाएगा।

दूसरा समझौता अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के साथ हुआ है। कंपनी इस परियोजना में विकास और उत्पादन साझेदार के रूप में डीआरडीओ के साथ काम करेगी। वह विमानों में लगने वाली मिशन प्रणालियों के विकास और उनके एकीकरण में सहयोग करेगी।

लंबी दूरी तक हवाई निगरानी की क्षमता बढ़ेगी

डीआरडीओ की सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (सीएबीएस) इस परियोजना की प्रमुख प्रयोगशाला है। एईडब्ल्यू एंड सी मार्क-2 प्रणाली के विकसित होने के बाद भारतीय वायुसेना को

  • लंबी अवधि तक हवाई निगरानी करने,

  • अधिक दूरी से संभावित खतरों का पता लगाने,

  • सुरक्षित संचार स्थापित करने,

  • युद्धक्षेत्र की बेहतर जानकारी हासिल करने और

  • कमान एवं नियंत्रण क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

इससे लंबी दूरी से आने वाले संभावित खतरों का समय रहते पता लगाकर उनका अधिक प्रभावी ढंग से जवाब देना संभव होगा।

डीआरडीओ, अदाणी और वायुसेना मिलकर करेंगे सिस्टम इंटीग्रेशन

संशोधित ए321 विमान एयरबस डिफेंस एंड स्पेस उपलब्ध कराएगी। इसके बाद डीआरडीओ, अदाणी डिफेंस और भारतीय वायुसेना मिलकर विमानों में मिशन प्रणालियों के एकीकरण और उड़ान परीक्षण का काम करेंगे। इस साझेदारी के तहत डीआरडीओ अपनी रक्षा अनुसंधान क्षमता, मिशन सिस्टम विशेषज्ञता और स्वदेशी तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराएगा। वहीं, अदाणी डिफेंस उन्नत विनिर्माण, सिस्टम इंटीग्रेशन और पूरे जीवनचक्र के दौरान तकनीकी सहायता में योगदान देगा।

भारत पांच देशों के विशेष क्लब में होगा शामिल

एईडब्ल्यू एंड सी जैसी स्वदेशी क्षमता विकसित करने वाले देशों की संख्या अब तक सीमित रही है। अमेरिका, फ्रांस, इजराइल, चीन और स्वीडन के बाद भारत भी इस चुनिंदा समूह में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आईएसीसीएस से जुड़ने पर मजबूत होगी वायु रक्षा

एईडब्ल्यू एंड सी मार्क-2 प्लेटफॉर्म को भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (आईएसीसीएस) से जोड़ा जाएगा। आईएसीसीएस एक देशव्यापी कमान और नियंत्रण नेटवर्क है, जो निगरानी, वायु रक्षा और सैन्य अभियानों से जुड़े संसाधनों को वास्तविक समय में जोड़ता है। इसके साथ एकीकरण से .....

  • हवाई खतरों की पहचान और निगरानी बेहतर होगी,

  • निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी,

  • विभिन्न रक्षा प्रणालियों के बीच समन्वय बढ़ेगा और

  • संभावित खतरों के खिलाफ प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।

छह ए321 विमानों को सैन्य उपयोग के लिए बदला जाएगा
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