

नई दिल्ली : अगर आपने कभी म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और बाद में अपने फोलियो को भूल गए हैं, तो संभव है कि आपका पैसा अभी भी फंड हाउस के पास बिना दावे के पड़ा हो। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यूचुअल फंड में अनक्लेम्ड रकम वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3,811 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 3,452 करोड़ रुपये थी। यानी इसमें करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
अनक्लेम्ड रकम में सबसे बड़ा हिस्सा डिविडेंड का है। वित्त वर्ष 2024-25 में लावारिस डिविडेंड 2,324 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में करीब 16 प्रतिशत बढ़कर 2,689 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, अनक्लेम्ड रिडेम्प्शन राशि 1,128 करोड़ रुपये से मामूली घटकर 1,122 करोड़ रुपये रह गई।
सेबी के मुताबिक, पुराना मोबाइल नंबर, ईमेल या पता अपडेट नहीं करना और बैंक खाते की जानकारी बदलने के बावजूद म्यूचुअल फंड फोलियो में उसे अपडेट न करना इसकी प्रमुख वजहों में शामिल है। बैंक खाता बंद होने या भुगतान संबंधी जानकारी गलत होने पर डिविडेंड और रिडेम्प्शन की रकम निवेशक तक नहीं पहुंच पाती।
निवेशक संबंधित म्यूचुअल फंड हाउस की वेबसाइट पर फोलियो की स्थिति जांच सकते हैं। इसके अलावा एम्फी के MITRA प्लेटफॉर्म के जरिए निष्क्रिय और अनक्लेम्ड फोलियो की जानकारी हासिल की जा सकती है। केवाईसी और बैंक विवरण अपडेट करने के बाद पात्र निवेशक अपनी रकम पर दावा कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में म्यूचुअल फंड्स का सकल संसाधन जुटाव 14.9 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन रिडेम्प्शन में 16.5 प्रतिशत की वृद्धि के कारण शुद्ध निवेश प्रवाह 9.7 प्रतिशत घटकर 7.4 लाख करोड़ रुपये रह गया।