

मुंबई : टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल में शीर्ष स्तर पर कुछ मतभेद होने की वजह से मंगलवार को चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त करने का फैसला टाल दिया गया। सूत्रों के मुताबिक , इसके पीछे टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा की तरफ से रखी गई कुछ शर्तों की अहम भूमिका रही। सूत्रों के मुताबिक, कुछ निदेशकों ने पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को मतदान के लिए रखने का सुझाव दिया, लेकिन चंद्रशेखरन ने इसे टालने का अनुरोध किया। बैठक के बाद पत्रकारों से उन्होंने कहा, मैंने इसे स्थगित करने की सिफारिश की क्योंकि एक निदेशक का यही अनुरोध था। टाटा संस के लिए कुछ भी नहीं बदला है।
क्या है मामला : चंद्रशेखरन का टाटा संस चेयरमैन के तौर पर मौजूदा कार्यकाल फरवरी, 2027 में खत्म होने वाला है जिसे आगे बढ़ाने पर निदेशक मंडल में चर्चा हो रही थी। इसी दौरान टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने पुनर्नियुक्ति को लेकर कुछ शर्तें रख दीं। नोएल टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों में हो रहे नुकसान और टाटा संस द्वारा संभावित कर्ज वृद्धि पर चिंता जताई। उनका मानना था कि कर्ज बढ़ने की स्थिति में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना पड़ सकता है। नोएल टाटा आने वाले समय में टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने के भी पक्ष में नहीं हैं और इस संबंध में वह लिखित प्रतिबद्धता चाहते हैं। चंद्रशेखरन ने कथित तौर पर कहा कि बाजार सूचीबद्ध न होने का पक्का वचन देना नियामकीय परिस्थितियों को देखते हुए मुश्किल है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के तहत टाटा संस समेत 15 कंपनियों को 30 सितंबर, 2025 तक सूचीबद्ध होने का समय दिया गया था।
क्या है स्थिति : टाटा समूह ने इस अनिवार्यता से बचने के लिए ‘प्रमुख निवेश कंपनी’ का अपना पंजीकरण वापस लेने का आवेदन किया है, जिस पर अभी अंतिम निर्णय लंबित है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पंजीकरण रद्द नहीं होने तक संस्था अपना काम जारी रख सकती है।
पुनर्नियुक्ति के एजेंडा पर विस्तार से चर्चा : यह बैठक समूह मुख्यालय ‘बॉम्बे हाउस’ में लंबी चली और पुनर्नियुक्ति के एजेंडा पर विस्तार से चर्चा हुई। अन्य निदेशकों- वेणु श्रीनिवासन, हरीश मनवानी, अनीता जॉर्ज और सौरभ अग्रवाल को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं थी।
अगली बोर्ड बैठक कब : इस बात को लेकर स्पष्टता नहीं है कि अगली बोर्ड बैठक कब होगी। सूत्रों ने कुछ समाधान निकलने पर बैठक होने के संकेत दिए। चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और वह बाद में समूह की आईटी कंपनी टीसीएस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बने। फरवरी, 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल में समूह की 15 प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों का राजस्व और मुनाफा लगभग दोगुना हुआ है। उनके नेतृत्व में समूह ने भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई की योजना को आगे बढ़ाया, घाटे में चल रही एयर इंडिया का अधिग्रहण किया और कृत्रिम मेधा (एआई) से उपजे व्यवधानों के बीच टीसीएस के संचालन को दिशा दी।