आज-कल के आश्वासन में बीते कई दिन, करोड़ों नुकसान

अभी तक खड़ी गाड़ियां
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गाड़ी नहीं छूटी, ड्राइवराें के परिवार परेशान, सरकार से मदद की गुहार

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता/ सिलीगुड़ी : पिछले कई दिनों से गाड़ी नहीं छूटने के कारण संबंधित लोगों और उनके परिवारों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। एसोसिएशन के मुताबिक, करोड़ों रुपये की कार्यशील पूंजी माल में फंसी हुई है और उत्पादन कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। लंबे समय तक RPC की निकासी बाधित रहने से रिफाइनरियों में inventory बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। इस गतिरोध का असर CPC निर्माताओं, परिवहनकर्ताओं और ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें लगातार आश्वासन दिया जा रहा है कि “आज हो जाएगा”, “कल हो जाएगा”, लेकिन दिन बीतते जा रहे हैं और अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। यह घटना है है श्रीरामपुर बार्डर इलाके की जो कि असम बंगाल के बीच है। एक पीड़ित ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि शुरुआत से ही उन्हें पुलिस और संबंधित अधिकारियों की ओर से जल्द समाधान का भरोसा दिया जा रहा था। एक दिन कहा गया कि अगले दिन गाड़ी छोड़ दी जाएगी, लेकिन वह “कल” अब 17 दिन में बदल चुका है। इस दौरान परिवार लगातार चिंता और परेशानी में है। पीड़ितों का कहना है कि वे अपनी समस्या को लेकर अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।

खाने-पीने और जरूरी सुविधाओं की भी परेशानी

पीड़ितों में ड्राइवरों का कहना है कि इतने लंबे समय तक बाहर रहने के कारण उन्हें रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को लेकर भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खाने-पीने और बाथरूम जैसी सुविधाओं को लेकर भी स्थिति आसान नहीं है। एक पीड़ित ने भावुक होकर कहा कि उनका भी घर-परिवार है। घर में परिवार के सदस्य लगातार चिंता में हैं। किसी के घर में पैसे के लेन-देन से जुड़ी परेशानी है तो किसी के परिवार में बीमारी जैसी समस्या है। ऐसे में इतने दिनों तक घर से दूर रहकर इस तरह इंतजार करना परिवारों के लिए बेहद मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, सैकड़ों चालक दो सप्ताह से अधिक समय से परिवारों से दूर फंसे हैं। एसोसिएशन ने इसे आर्थिक समस्या के साथ-साथ गंभीर मानवीय मुद्दा भी बताया है। CPC की आपूर्ति प्रभावित होने से aluminium smelting और graphite electrode जैसे downstream उद्योगों पर भी असर पड़ने की चिंता है।

अत्यावश्यक हस्तक्षेप हेतु अनुरोध

एसोसिएशन ने केंद्र और IOCL से पश्चिम बंगाल सरकार के साथ उच्चस्तरीय समन्वय कर वैध और GST-भुगतान किए गए RPC consignments की तत्काल आवाजाही बहाल कराने, किसी भी प्रतिबंध की स्थिति में लिखित आदेश जारी करने तथा IOCL की ओर से एक वरिष्ठ नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि प्रत्येक अतिरिक्त दिन से उद्योग और परिवहन क्षेत्र का नुकसान बढ़ रहा है, इसलिए मामले का शीघ्र समाधान आवश्यक है। श्रीरामपुर सीमा पर 300 से अधिक RPC लदे ट्रक रोके जाने से उद्योगों में चिंता, बरोनी कैल्सिनर्स एसोसिएशन ने मांगा तत्काल हस्तक्षेप की है। असम स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की रिफाइनरियों से रॉ पेट्रोलियम कोक लेकर बिहार और अन्य राज्यों के CPC संयंत्रों की ओर जा रहे 300 से अधिक ट्रकों के पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर सीमा क्षेत्र में लंबे समय से रोके जाने से उद्योग जगत में गंभीर चिंता पैदा हो गई है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, 3 अक्टूबर को भी श्रीरामपुर सीमा पर करीब 100 कार्बन-लदे ट्रकों के पहिए थमे हुए थे।


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