साइबर ठगी रोकने के लिए अदालत सख्त, लेकिन टेक कंपनियों ने जताई चिंता

दिल्ली हाईकोर्ट ने फर्जी वेबसाइटों पर नकेल कसने के लिए कड़े निर्देश दिए, लेकिन गोडैडी समेत टेक कंपनियों का तर्क है कि सख्त नियमों से वैध वेबसाइट संचालकों पर अतिरिक्त बोझ और जोखिम बढ़ जाएगा
गोडैडी समेत कई टेक कंपनियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है
फर्जी वेबसाइटों पर कार्रवाई के लिए नए निर्देश जारी
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नई दिल्ली : देश में तेजी से बढ़ रही साइबर ठगी को रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हालांकि, इन नए नियमों को लेकर दुनिया की बड़ी डोमेन रजिस्ट्रेशन कंपनी गोडैडी (GoDaddy) समेत कई टेक कंपनियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि इन नियमों से साइबर अपराधियों के बजाय ईमानदार वेबसाइट चलाने वाले लोग ज्यादा परेशान हो सकते हैं।

1100 फर्जी वेबसाइट बंद करने के आदेश पर शुरू हुआ मामला

यह मामला तब शुरू हुआ जब अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, मैकडॉनल्ड्स और श्याओमी सहित 20 से अधिक कंपनियों ने शिकायत की कि उनके नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से धोखाधड़ी की जा रही है। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 1,100 से अधिक फर्जी वेबसाइटों को बंद करने का आदेश दिया।

मिलते जुलते नाम पर डोमेन पंजीकृत कराने पर रोक का निर्देश

अदालत ने इसके साथ कुछ नए निर्देश भी दिए। इनमें वेबसाइट का डोमेन खरीदने वाले व्यक्ति की पहचान छिपाने वाली सुविधा को डिफॉल्ट रूप से बंद करना, जरूरत पड़ने पर 72 घंटे के भीतर वेबसाइट मालिक की जानकारी उपलब्ध कराना और बड़े ब्रांडों से मिलते-जुलते नाम वाले नए डोमेन पंजीकृत करने पर रोक लगाना शामिल है।

व्यक्तिगत जानकारी देने से खतरे में पड़ सकती है सुरक्षा

गोडैडी का कहना है कि यदि वेबसाइट मालिकों की व्यक्तिगत जानकारी आसानी से उपलब्ध कराई जाएगी तो पत्रकारों, छोटे कारोबारियों और अन्य वैध उपयोगकर्ताओं की निजता और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। कंपनी का यह भी कहना है कि हर मामले में केवल 72 घंटे के भीतर यह तय करना संभव नहीं है कि जानकारी मांगने वाले का उद्देश्य सही है या नहीं।

16 जुलाई को होगी सुनवाई

कंपनी ने यह भी तर्क दिया है कि किसी ब्रांड से मिलते-जुलते हर नाम पर रोक लगाना व्यावहारिक नहीं है। इससे कई सामान्य शब्द और वैध वेबसाइट नाम भी प्रभावित हो सकते हैं तथा नए डोमेन पंजीकृत कराना मुश्किल हो जाएगा।

वहीं, केंद्र सरकार का मानना है कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और जांच एजेंसियों को समय पर जानकारी मिलना जरूरी है। सरकार चाहती है कि डोमेन पंजीकरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो ताकि फर्जी वेबसाइटों पर जल्द कार्रवाई की जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी। अदालत का फैसला देश में इंटरनेट सुरक्षा और वेबसाइटों के नियमों की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

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