

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों के लिए वित्तीय जानकारी हासिल करने और साझा करने की प्रक्रिया को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब ग्राहक किसी एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-अकाउंट एग्रीगेटर (NBFC-AA) के जरिये अलग-अलग वित्तीय सूचना प्रदाताओं के पास मौजूद अपनी जानकारी को एक जगह हासिल कर सकेंगे।
मसलन, अगर किसी ग्राहक की बैंकिंग जानकारी एक वित्तीय सूचना प्रदाता के पास है और निवेश से जुड़ी जानकारी दूसरे के पास, तो उसे दोनों के लिए अलग-अलग अकाउंट एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वह अपनी पसंद के किसी एक NBFC-AA के माध्यम से दोनों तरह की जानकारी हासिल और साझा कर सकेगा। यह सुविधा ग्राहक की सहमति और सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था के तहत काम करेगी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा कि NBFC-अकाउंट एग्रीगेटरों के बीच समन्वय की व्यवस्था लागू करने का फैसला ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। अकाउंट एग्रीगेटर RBI के नियमन के तहत काम करने वाली व्यवस्था है, जो ग्राहक की अनुमति से विभिन्न संस्थानों के बीच वित्तीय जानकारी डिजिटल तरीके से साझा करने में मदद करती है।
इसके अलावा, RBI ने SEBI के नियमन वाले डिपॉजिटरी को NBFC-AA के जरिये अपने कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) में बैंक जमा खातों की जानकारी शामिल करने की सुविधा देने का फैसला किया है। इससे डीमैट खाताधारक अपनी प्रतिभूतियों और बैंक जमा की जानकारी एक ही CAS में देख सकेंगे।
जिन ग्राहकों के पास डीमैट खाता नहीं है, वे भी NBFC-AA के जरिये अपनी वित्तीय जानकारी का एकीकृत विवरण प्राप्त कर उसे साझा कर सकेंगे। RBI के मुताबिक दोनों उपायों का उद्देश्य वित्तीय जानकारी तक पहुंच को सरल और ग्राहक-केंद्रित बनाना है। इन्हें 31 दिसंबर 2026 तक लागू किए जाने की उम्मीद है।