कोयला संकट गहराया, 59 बिजली संयंत्रों में तीन दिन से भी कम का स्टॉक

देश में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन भंडार खतरनाक स्तर पर, बढ़ती मांग और सीमित सौर-जलविद्युत क्षमता से ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल
बैटरी स्टोरेज की कमी और जलाशयों में घटते जलस्तर के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है
कोयला संकट गहराया, 59 बिजली संयंत्रों में तीन दिन से भी कम का स्टॉक
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नई दिल्ली : देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक बार फिर संकट के संकेत मिल रहे हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 9 सितंबर तक देश के 59 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का भंडार उनकी जरूरत के 25 प्रतिशत से भी कम रह गया है। इन संयंत्रों के पास करीब तीन दिन का ही कोयला बचा है।

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषक मनोज कुमार ने घटते कोयला भंडार को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चेतावनी बताया है। लंबे समय से जारी गर्मी और अल नीनो के प्रभाव के कारण बिजली की मांग ऊंची बनी हुई है। मई में अधिकतम मांग 270.70 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, जबकि हाल के दिनों में यह करीब 267 गीगावॉट बनी हुई है।

कोयले की रैक 370 से बढ़कर हुई 444

सौर ऊर्जा से कुछ राहत मिल रही है, लेकिन बैटरी स्टोरेज की कमी और जलाशयों में घटते जलस्तर के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।

संकट से निपटने के लिए कोयला आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। रेलवे ने बिजली संयंत्रों के लिए कोयला रैक की संख्या 3 सितंबर के 370 से बढ़ाकर 6 सितंबर को 444 कर दी। कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों ने खदानों में करीब 76 मिलियन टन स्टॉक होने की जानकारी दी है और सड़क मार्ग से भी आपूर्ति बढ़ाई है।

पंजाब में भी संकट: राजपुरा थर्मल प्लांट की 700 मेगावाट की एक इकाई तकनीकी खराबी से बंद हो गई। रोपड़ और तलवंडी साबो की इकाइयां भी पहले से बंद हैं, जिससे राज्य में बिजली संकट और गहरा गया है।

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