द्विपक्षीय बातचीत से समुद्री मार्ग से कच्चे तेल की आपूर्ति में हो सकता है सुधार

ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री मार्गों पर आवाजाही धीरे-धीरे सुधर सकती है
मूडीज
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नयी दिल्ली : वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द खत्म होने की संभावना कम है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने की उम्मीद भी फिलहाल नहीं दिख रही है। अपनी भू-राजनीतिक जोखिम संबंधी वैश्विक रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री मार्गों पर आवाजाही धीरे-धीरे सुधर सकती है, लेकिन यह सामान्य तरीके से नहीं बल्कि द्विपक्षीय समझौतों के जरिये होगी। इसके तहत चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तेल आयातक देश ईरान के साथ अलग-अलग स्तर पर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकते हैं। मूडीज के अनुसार, लारक द्वीप और ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास कुछ समन्वित पारगमन गलियारे उभर रहे हैं, लेकिन 2026 में भी संघर्ष-पूर्व स्तर की आवाजाही बहाल होना मुश्किल दिखता है।यदि अगले छह महीनों में जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू भी हो जाती है, तब भी वैश्विक तेल बाजार आपूर्ति संकट से जूझता रहेगा। इससे ऊर्जा कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहेगा और लागत, मांग तथा वित्तीय परिस्थितियों पर असर पड़ेगा।

तेल की कीमतें : मूडीज़ ने अनुमान जताया कि इस वर्ष ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती हैं। हालांकि, नए भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते कीमतों में इससे बाहर भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। यदि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 90-110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं तो कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में 0.2 से 0.8 प्रतिशत अंक तक की कमी आ सकती है।

भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल : भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है क्योंकि उसके करीब 46 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात पश्चिम एशिया से होता है। ऊंची तेल कीमतों से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और चालू खाते के घाटे (कैड) तथा राजकोषीय प्रबंधन पर असर पड़ सकता है।

जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान : एजेंसी ने मई के अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में 2026 कैलेंडर वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 0.8 प्रतिशत अंक घटाकर छह प्रतिशत कर दिया है।

क्या है स्थिति : अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ पश्चिम एशिया संघर्ष अब तीसरे महीने में पहुंच गया है। इस संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल और एलएनजी व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा आता था। संघर्ष के बाद इस मार्ग से समुद्री यातायात में 90 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। बीमा लागत बढ़ने, सुरक्षा जोखिम और समुद्र में बारूदी सुरंगों की मौजूदगी के कारण पोत परिवहन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। वहीं ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच व्यापक उतार-चढ़ाव देख चुकी हैं।

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