भारत में ऐपल पे की शुरुआत, गूगल पे और पेटीएम से कितना अलग है यह भुगतान मंच?

एक दशक से ज्यादा इंतजार के बाद भारत आया ऐपल पे, शुरुआत में ऐक्सिस बैंक के वीज़ा और मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड का मिलेगा समर्थन
भारत में ऐपल पे की शुरुआत, फिलहाल ऐक्सिस बैंक के पात्र क्रेडिट कार्ड से संपर्क रहित भुगतान की सुविधा।
भारत में ऐपल पे की शुरुआत, फिलहाल ऐक्सिस बैंक के पात्र क्रेडिट कार्ड से संपर्क रहित भुगतान की सुविधा।
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भारत में डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऐपल ने अपनी भुगतान सेवा ऐपल पे शुरू कर दी है। अमेरिका में शुरुआत के करीब 12 साल बाद यह सेवा भारत पहुंची है। हालांकि, भारतीय बाजार में इसकी शुरुआत गूगल पे, पेटीएम और दूसरे यूपीआई आधारित मंचों से अलग तरीके से हुई है।

ऐपल पे फिलहाल आईफोन, आईपैड और ऐपल वॉच पर उपलब्ध है। शुरुआत में ऐक्सिस बैंक की ओर से जारी वीज़ा और मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड को इसमें जोड़ा जा सकता है। मैक कंप्यूटर पर भी यह सेवा जल्द उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसके जरिए उपयोगकर्ता दुकानों, मोबाइल अनुप्रयोगों और वेबसाइटों पर भुगतान कर सकेंगे।

यूपीआई नहीं, कार्ड से होगा भुगतान

भारत में ऐपल पे की शुरुआत की सबसे अहम बात यह है कि फिलहाल इसमें यूपीआई भुगतान की सुविधा नहीं है। यानी उपयोगकर्ता सामान्य यूपीआई की तरह क्यूआर कोड स्कैन करके सीधे बैंक खाते से भुगतान नहीं कर पाएंगे।

ऐपल पे की मौजूदा व्यवस्था कार्ड आधारित है। उपयोगकर्ता अपने पात्र ऐक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड को ऐपल वॉलेट में जोड़ेंगे। इसके बाद वे संपर्क रहित भुगतान की सुविधा वाले बिक्री केंद्रों पर आईफोन या ऐपल वॉच से भुगतान कर सकेंगे।

यही वजह है कि ऐपल पे की शुरुआत भारत में गूगल पे या पेटीएम के सीधे विकल्प के तौर पर नहीं हुई है। गूगल पे और पेटीएम जैसे मंच भारत में बड़े पैमाने पर यूपीआई भुगतान के लिए इस्तेमाल होते हैं, जबकि ऐपल पे का शुरुआती ध्यान कार्ड और संपर्क रहित भुगतान पर है।

कैसे काम करेगा ऐपल पे?

ऐपल पे इस्तेमाल करने के लिए पात्र ऐक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड को ऐपल वॉलेट में जोड़ना होगा। इसके लिए उपयोगकर्ता अपने आईफोन में वॉलेट ऐप खोलकर कार्ड जोड़ सकते हैं। ऐक्सिस बैंक के नवीनतम अनुप्रयोग के जरिए भी कार्ड जोड़ा जा सकता है।

दुकान पर भुगतान करने के लिए आईफोन के बगल वाले बटन को दो बार दबाना होगा। इसके बाद चेहरे की पहचान, अंगुली के निशान या उपकरण के पासकोड के जरिए पहचान की पुष्टि की जाएगी। फिर आईफोन के ऊपरी हिस्से या ऐपल वॉच को संपर्क रहित भुगतान मशीन के पास ले जाना होगा। इस प्रक्रिया में अलग से पिन डालने या हर भुगतान के लिए एक बार इस्तेमाल होने वाला पासवर्ड भरने की जरूरत नहीं होगी।

ऐपल पे का इस्तेमाल मोबाइल अनुप्रयोगों और वेबसाइटों पर भी किया जा सकेगा। इससे बार-बार कार्ड नंबर, संपर्क जानकारी या बिलिंग और सामान पहुंचाने का पता भरने की जरूरत कम हो सकती है।

कौन से उपकरण और कार्ड काम करेंगे?

भारत में ऐपल पे के लिए आईफोन एक्सआर या उसके बाद के मॉडल इस्तेमाल किए जा सकते हैं, बशर्ते उनमें आईओएस 18 या उसके बाद का संस्करण हो। ऐपल वॉच सीरीज 6 या उसके बाद के मॉडल भी समर्थित हैं। इन्हें संबंधित आईफोन से जोड़ा होना चाहिए।

शुरुआत में यह सेवा केवल ऐक्सिस बैंक द्वारा जारी पात्र वीज़ा और मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड के लिए उपलब्ध है। इसका मतलब है कि हर आईफोन उपयोगकर्ता फिलहाल ऐपल पे का इस्तेमाल नहीं कर सकता। कंपनी ने भविष्य में और बैंकों तथा कार्ड नेटवर्क को जोड़ने की समयसीमा स्पष्ट नहीं की है। इसलिए शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल करने वाले भारतीय ग्राहकों का दायरा सीमित रहेगा।

हजारों दुकानों और अनुप्रयोगों पर भुगतान

कंपनी के मुताबिक, भारत में शुरुआत के समय कई दुकानों, मोबाइल अनुप्रयोगों और वेबसाइटों पर ऐपल पे स्वीकार किया जाएगा। इनमें ऐपल स्टोर, ब्लिंकिट, चायोस, क्रोमा, इक्सिगो, रिलायंस ब्रांड्स, टाटा वन एमजी और जोमैटो जैसे नाम शामिल हैं। ऐपल ने भारत में भुगतान सेवा देने वाली कई कंपनियों के साथ भी काम किया है। इनमें कैशफ्री, जूसपे, एमस्वाइप, पेटीएम, पेयू, पाइन लैब्स, रेजरपे और वर्ल्डलाइन शामिल हैं।

इसका मतलब है कि ऐपल पे का इस्तेमाल सिर्फ कंपनी की अपनी सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा। जहां यह भुगतान सुविधा उपलब्ध होगी, वहां उपयोगकर्ता अपने पात्र कार्ड के जरिए भुगतान कर सकेंगे।

सुरक्षा और निजी जानकारी पर जोर

ऐपल ने भारत में सेवा की शुरुआत के साथ सुरक्षा और निजता पर भी जोर दिया है। कंपनी के मुताबिक, ऐपल पे में वास्तविक कार्ड नंबर उपकरण या कंपनी के सर्वर पर सुरक्षित नहीं रखे जाते और न ही इन्हें दुकानदारों के साथ साझा किया जाता है। इसके बजाय हर कार्ड के लिए एक अलग डिजिटल पहचान संख्या बनाई जाती है, जिसे उपकरण के सुरक्षित हिस्से में कूटबद्ध करके रखा जाता है। भुगतान के समय कार्ड की वास्तविक जानकारी साझा करने के बजाय इसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनी का कहना है कि वह ऐसे लेनदेन की जानकारी अपने पास नहीं रखती, जिसे सीधे उपयोगकर्ता से जोड़ा जा सके। अगर आईफोन खो जाए या चोरी हो जाए, तो उपयोगकर्ता अपने उपकरण को खोजने, बंद करने या उससे भुगतान रोकने के लिए ‘फाइंड माई’ सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है।

गूगल पे और पेटीएम से कितना अलग?

भारत में ऐपल पे की शुरुआत ऐसे समय हुई है, जब डिजिटल भुगतान का बड़ा हिस्सा यूपीआई के जरिए होता है। गूगल पे, पेटीएम और दूसरे भुगतान मंच क्यूआर कोड, व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान और सीधे बैंक खाते से भुगतान जैसी सुविधाओं के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐपल पे की मौजूदा व्यवस्था इससे अलग है। यह बैंक खाते से सीधे यूपीआई भुगतान कराने के बजाय उपयोगकर्ता के पात्र क्रेडिट कार्ड को डिजिटल रूप में इस्तेमाल करने की सुविधा देता है।

इसलिए रोजमर्रा के छोटे भुगतान के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने वाले ग्राहकों की प्रक्रिया फिलहाल इससे नहीं बदलेगी। लेकिन जिन लोगों के पास पात्र क्रेडिट कार्ड है और वे संपर्क रहित भुगतान करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक नया विकल्प बन सकता है।

भारत में देर से क्यों आई यह सेवा?

ऐपल पे की भारत में शुरुआत लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। इस सेवा की शुरुआत अमेरिका में 2014 में हुई थी, जबकि भारत पहुंचने में इसे एक दशक से ज्यादा समय लगा। किसी नए बाजार में ऐसी सेवा शुरू करने के लिए स्थानीय साझेदारों, भुगतान व्यवस्था और जरूरी तकनीकी ढांचे का तैयार होना महत्वपूर्ण होता है। भारत में संपर्क रहित भुगतान मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल और डिजिटल भुगतान के विस्तार ने भी इसके लिए माहौल तैयार किया है।

फिलहाल ऐपल पे की शुरुआत सीमित दायरे से हुई है। केवल एक बैंक के पात्र क्रेडिट कार्ड और यूपीआई सुविधा के बिना शुरू होने के कारण इसकी पहुंच शुरुआती चरण में सीमित रह सकती है। हालांकि, ऐपल के उपकरण इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की बड़ी संख्या को देखते हुए भविष्य में नए बैंकों, कार्ड और भुगतान सुविधाओं का जुड़ना भारत में इस सेवा की भूमिका तय कर सकता है।

फिलहाल इतना साफ है कि भारत के डिजिटल भुगतान बाजार में ऐपल ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। भारतीय उपयोगकर्ताओं की आदतों में यह कितना बदलाव लाएगा, यह आगे मिलने वाली सुविधाओं और इसके विस्तार पर निर्भर करेगा।

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