AI आईटी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, उन्हें मजबूत करेगा

इन्फोसिस चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा कि जनरेटिव AI आईटी कंपनियों को प्रतिस्थापित नहीं करेगा, बल्कि बेहतर कोडिंग टूल, उत्पादकता वृद्धि और एंटरप्राइज समाधान के लिए मजबूत संरचना, साइबर सुरक्षा व डेटा गवर्नेंस के जरिए उन्हें और सशक्त बनाएगा
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नयी दिल्ली : इन्फोसिस के सह-संस्थापक एवं चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा कि कृत्रिम मेधा (AI) आईटी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन्हें और अधिक सशक्त बनाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी 2030 तक 400 अरब डॉलर के AI-केंद्रित सेवाओं के बड़े अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार है। कंपनी की 45वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए नीलेकणि ने तेजी से हो रहे प्रौद्योगिकी बदलावों के कारण आईटी उद्योग के सामने मौजूद ‘अस्तित्व से जुड़े सवाल’ पर चर्चा की। उन्होंने कहा, जनरेटिव AI (जेनAI) के शुरू होने के तीन साल बाद भी इन्फोसिस पहले से अधिक प्रासंगिक है और आने वाले दशक के लिए अच्छी स्थिति में है।

क्या है स्थिति : हम बेहतर कोडिंग उपकरणों को अपनाते हुए अपनी उत्पादकता बढ़ा रहे हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर विकास के क्षेत्र में अभी बहुत काम बाकी है। बड़े उद्यम ग्राहकों में AI के उपयोग को लेकर एक अंतर मौजूद है और उसे पाटना ही सबसे बड़ा अवसर है। AI हमारी जैसी कंपनियों की जगह नहीं लेगा। यह उन कंपनियों को और मजबूत करेगा जो उद्देश्य के साथ आगे बढ़ती हैं और तेजी से खुद को ढालती हैं। उद्यम समाधान के लिए कठोर परीक्षण, मजबूत संरचना, ठोस साइबर सुरक्षा और सख्त डेटा शासन की आवश्यकता होती है, जिसे बाहरी मंच पर पूरी तरह निर्भर होकर नहीं किया जा सकता।

आधुनिकीकरण जरूरी : AI क्रांति ने पुरानी प्रणाली के आधुनिकीकरण को जरूरी बना दिया है, जिससे इन्फोसिस को इस संरचनात्मक बदलाव का लाभ उठाने का अवसर मिल रहा है। ग्राहक इन्फोसिस पर भरोसा करते हैं कि वह अपने अनुभव के आधार पर उन्हें एंटरप्राइज AI की जटिलताओं से निपटने में मदद करेगा। साथ ही, कंपनी अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से 90 प्रतिशत के साथ AI से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है।

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