

मुंबई : टाटा स्टील औद्योगिक सुरक्षा को हादसे के बाद की जांच से आगे ले जाकर हादसा होने से पहले खतरों की पहचान और रोकथाम पर जोर दे रही है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कंप्यूटर विजन, कनेक्टेड वर्कफोर्स और रिमोट ऑपरेशन तकनीक का तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी के विभिन्न संयंत्रों में 10,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनसे एआई की मदद से असुरक्षित गतिविधियों की पहचान कर तत्काल अलर्ट जारी किए जाते हैं।
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) राजीव मंगल ने बताया कि कंपनी का लक्ष्य सुरक्षा को ‘पोस्ट-इंसिडेंट इन्वेस्टिगेशन’ से ‘रियल टाइम एक्सीडेंट प्रिवेंशन’ की ओर ले जाना है। पिछले 15 वर्षों में कंपनी समूह ने लॉस्ट टाइम इंजरी फ्रीक्वेंसी रेट (LTIFR) में 38 प्रतिशत की कमी हासिल की है।
कंपनी देशभर में कनेक्टेड वर्कफोर्स प्लेटफॉर्म भी लागू कर रही है। एआई आधारित गेट पास और बीकन संयंत्रों के भीतर कर्मचारियों की आवाजाही पर नजर रखते हैं और अधिकृत या सुरक्षित क्षेत्रों से विचलन होने पर स्वत: अलर्ट देते हैं। इंटीग्रेटेड रिमोट ऑपरेशन सेंटर (iRoC) के जरिये खदानों और संयंत्रों में जोखिम वाले कार्यों की दूर से निगरानी और जहां संभव हो, संचालन किया जा रहा है।
लॉजिस्टिक्स सुरक्षा में भी एआई का इस्तेमाल हो रहा है। रोजाना 8,000-10,000 ट्रक और ट्रेलर संयंत्रों में आते हैं। कैमरों से चालक की थकान, सिर की गतिविधि और मोबाइल फोन के इस्तेमाल की निगरानी कर चेतावनी दी जाती है। ओवरहेड केबल से ट्रकों की टक्कर रोकने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कंपनी के अनुसार 2035 तक एआई आधारित खतरा पूर्वानुमान, डिजिटल ट्विन, ड्रोन, ऑटोनॉमस निरीक्षण, वियरेबल और कनेक्टेड वर्कर तकनीक औद्योगिक सुरक्षा का अहम आधार बनेंगे।