बिहार
बिहार में फिर बाढ़ का खतरा
पटना :
नेपाल के तराई इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बिहार में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी के तटवर्ती इलाकों में स्थिति संवेदनशील हो गयी है। सोमवार सुबह वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज से अधिकतम 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, सोमवार सुबह गंडक बैराज का डिस्चार्ज घटकर 4,97,200 क्यूसेक रह गया, जबकि कोसी और सोन नदियों में जलप्रवाह बढ़ने का रुझान दर्ज किया गया। बिरपुर स्थित कोसी बैराज पर 1,80,490 क्यूसेक तथा इंद्रपुरी स्थित सोन बैराज पर 1,36,124 क्यूसेक जलप्रवाह रिकॉर्ड किया गया।
82 हजार लोग प्रभावित :
आपदा प्रबंधन विभाग (DMD) ने बताया कि कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें डुमरियाघाट में गंडक, बलतारा में कोसी, ढेंग, सोनाखान, कटौंझा और बेनीबाद में बागमती तथा गोवा बारी में लालबकेया नदी शामिल हैं। नेपाल और बिहार के सीमावर्ती जिलों में पिछले तीन-चार दिनों से हुई भारी बारिश के कारण गंडक, कोसी, बागमती समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे कुछ जिलों के निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ से सुपौल और पश्चिम चंपारण के 2 जिलों के 11 प्रखंडों की 23 गांवों में लगभग 82 हजार लोग प्रभावित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्थिति की समीक्षा की :
गंडक नदी में अधिकतम 5.43 लाख क्यूसेक पानी के छोड़े जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जलस्तर, बैराज से पानी के प्रवाह, तटबंधों की स्थिति और तटबंधों पर गश्त की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को पूरी रात बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने और जलस्तर, बैराज से जल निकासी तथा तटबंधों की स्थिति पर सतर्क एवं पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया।

