'जनता के नकारने पर न्यायिक मंच का सहारा लेते हैं दल,' जन सुराज को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट का रुख करने को कहा
प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर
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नयी दिल्ली/पटना : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव निरस्त किये जाने संबंधी याचिका पर पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को शुक्रवार को फटकार लगाते हुए कहा कि जब लोग ‘आपको नकार देते हैं, तो आप राहत पाने के लिए’ न्यायिक मंच का सहारा लेते हैं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने जन सुराज की संबंधित याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट का रुख करने को कहा। पीठ ने चुनाव हारने के बाद लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करने की कोशिश को लेकर गहरी नाराजगी भी जताई।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सवालिया लहजे में कहा, आपको कितने वोट मिले ? उन्होंने कहा, जब लोग आपको नकार देते हैं, तो आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का सहारा लेते हैं! किसी को तो उसी समय योजना को चुनौती देनी चाहिए थी। आप तो पूरे राज्य के चुनाव को अमान्य घोषित करने के लिए एक व्यापक निर्देश चाहते हैं।

पीठ ने कहा कि यह याचिका पूरे राज्य के लिए एक समग्र चुनाव याचिका के अलावा और कुछ नहीं है। पीठ ने कहा, चूंकि यह मामला सिर्फ एक राज्य से संबंधित है, इसलिए कृपया संबंधित पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटायें। हालांकि, न्यायालय ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में मुफ्त योजनाओं का गंभीर मुद्दा है, जिसकी वह गंभीरता से पड़ताल करेगा।

किशोर की पार्टी ने अपनी याचिका में 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन का हवाला दिया था और चुनाव निरस्त करने का शीर्ष अदालत से अनुरोध किया था।

याचिका में कहा गया था कि कर्ज में डूबी राज्य सरकार ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 15,600 करोड़ रुपये बांट दिए, जिससे अन्य राजनीतिक दलों को समान अवसर नहीं मिल पाया।

सुनवाई के दौरान, जन सुराज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी.यू. सिंह ने कहा कि जिस योजना के तहत मतदाताओं को भुगतान किया गया था, उसकी घोषणा चुनाव से ठीक पहले की गई थी और भुगतान तब किया गया जब चुनाव आचार संहिता लागू थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, जब किसी राज्य में गंभीर राजकोषीय घाटा हो और योजना की घोषणा के बाद तुरंत भुगतान कर दिया जाए तो ऐसे में इससे यही अर्थ जाता है कि मानो इसे खैरात में बांटा जा रहा है। इतना ही नहीं, चुनाव आचार संहिता की घोषणा के तुरंत बाद 35 लाख से अधिक लाभार्थियों को इस योजना में नामांकित किया गया।

पीठ ने कहा, प्रत्यक्ष हस्तांतरण योजनाएं अलग हैं। यह मामला महिला स्वयं सहायता समूहों से संबंधित है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत राज्य की महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए 10-10 हजार रुपये की प्रारंभिक आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243-सदस्यीय विधानसभा में 202 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी और विपक्षी दलों के ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) ने 35 सीट हासिल की, जबकि जन सुराज पार्टी (JSP) का खाता भी नहीं खुल पाया तथा उसके अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

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