सुल्तान पैलेस पर संकट : क्या 100 साल पुराना सुल्तान पैलेस जमींदोज हो जाएगा ?

फाइव स्टार हेरिटेज होटल की योजना के बीच समिति की गोपनीय रिपोर्ट से उठा सवाल
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पटना/नयी दिल्ली : बिहार मंत्रिमंडल ने पटना के मध्य में स्थित प्रतिष्ठित सुल्तान पैलेस की एक सदी से अधिक पुरानी ऐतिहासिक संरचना को संरक्षित रखते हुए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत पांच सितारा हेरिटेज होटल के निर्माण के प्रस्ताव को 10 सितंबर 2024 को मंजूरी दी थी। लेकिन एक रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद विरासत प्रेमियों ने आशंका जताई है कि सुल्तान पैलेस को ‘ढहाया’ जा सकता है।

राज्य सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उसी दिन संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले की घोषणा की थी, जिसका पटना के विरासत प्रेमियों और निवासियों ने स्वागत किया था।

हालांकि, लंबे समय से अटकी इस परियोजना पर कोई खास प्रगति नहीं हुई है, जिसे पहली बार राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा 2017 की शुरुआत में सार्वजनिक किया गया था और जिसके पूरा होने पर यह बिहार का पहला हेरिटेज होटल बन जाता। फिर भी, इसके संबंध में राज्य सरकार के कला और संस्कृति विभाग के सचिव की अध्यक्षता में ‘लगभग पांच महीने पहले’ एक ‘समिति’ का गठन किया गया था।

हालांकि, विश्व विरासत दिवस (18 अप्रैल) से कुछ दिन पहले, 16 अप्रैल को पटना के एक प्रमुख हिंदी दैनिक में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि समिति ने ‘पाया’ है कि सुल्तान पैलेस, जिसे 1922 में दिग्गज वकील सर सुल्तान अहमद ने अपने निवास के रूप में बनवाया था, विरासत भवन के रूप में सूचीबद्ध नहीं है।

इस रिपोर्ट ने विरासत स्थलों के संरक्षण के पैरोकारों में आक्रोश पैदा कर दिया है और उन्होंने आशंका जताई कि पांच सितारा होटल परियोजना के लिए इस प्रसिद्ध इमारत को ध्वस्त किया जा सकता है। इस इमारत का स्वामित्व वर्तमान में बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के पास है।

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब इस रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, हमें अभी तक उस समिति की रिपोर्ट नहीं मिली है, जिसका गठन 5-6 महीने पहले इमारत के संरक्षण और अन्य पहलुओं पर गौर करने के लिए किया गया था।

अधिकारियों और राज्य पर्यटन विभाग ने न तो 16 अप्रैल की उस मीडिया रिपोर्ट का खंडन किया है, जो एक अन्य प्रमुख हिंदी दैनिक में भी ऑनलाइन इसी तरह प्रकाशित हुई थी, और न ही अब तक रिपोर्ट की सामग्री, समिति की संरचना या उसके गठन के उद्देश्य से संबंधित कोई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई है।

पटना निवासी मोहम्मद उमर अशरफ, जो एक विरासत कार्यकर्ता हैं और बिहार की विरासत को बढ़ावा देने वाले दो लोकप्रिय ऑनलाइन पोर्टल चलाते हैं, ने आरोप लगाया कि ‘समिति का गठन गुपचुप तरीके से किया गया था और इसके कार्य या उद्देश्य के बारे में कोई पारदर्शिता नहीं है।’ उन्होंने सवाल किया कि राज्य सरकार या पर्यटन विभाग ने इस बारे में आधिकारिक तौर पर घोषणा क्यों नहीं की है।

मध्यप्रदेश की संरक्षण वास्तुकार सुप्रिया कुमार, जो पूर्व होल्कर राजवंश की विरासत संपत्तियों से संबंधित परियोजनाओं का हिस्सा रही हैं, ने कहा कि मैं सुल्तान पैलेस को ध्वस्त करने के किसी भी कदम को न केवल विरासत और दृश्य सौंदर्य की हानि के रूप में देखूंगी, बल्कि एक प्रतिष्ठित इमारत के पुन: उपयोग के अवसर को गंवाने के रूप में भी देखूंगी।

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