बिहार टेंडर घोटाला : ठेकेदार रिशु श्री पर तेजस्वी के 20 सवाल

रिशु श्री पर केंद्रित निविदा घोटाले में आईएएस नेटवर्क, कमीशन व्यवस्था और गुजरात की कंपनियों की भूमिका पर तेजस्वी का निशाना
तेजस्वी यादव
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पटना : बिहार में ठेकेदार रिशु श्री से जुड़ा कथित टेंडर घोटाला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को इस मामले को लेकर राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि हजारों करोड़ रुपये के कथित टेंडर घोटाले में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिले हैं।

तेजस्वी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), विशेष निगरानी इकाई (SVU) और अन्य एजेंसियों की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद सरकार को पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने कुल 20 सवालों के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली, जांच की दिशा और प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक सामान्य ठेकेदार बताए जा रहे रिशु श्री ने कई विभागों की निविदा प्रक्रिया को इतना कैसे प्रभावित किया।

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तेजस्वी ने पूछा कि यदि यह सब वर्षों तक चलता रहा तो निगरानी तंत्र, वित्तीय ऑडिट और प्रशासनिक व्यवस्था क्या कर रही थी। उनके अनुसार यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कहीं अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए पूरे तंत्र की अनदेखी तो नहीं की।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष ने ईडी जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि जांच में सामने आए चैट भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के कई वरिष्ठ अधिकारियों के प्रभावशाली नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं।

उन्होंने सवाल किया कि रिशु श्री को किस स्तर का संरक्षण प्राप्त था और वह अधिकारियों को किसके भरोसे निर्देश देता था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपपत्र में कई प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे जांच को लेकर राजनीतिक दबाव की आशंका पैदा होती है।

तेजस्वी ने दो IAS अधिकारियों के निलंबन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है तो आरोपपत्र में उनके नाम क्यों नहीं हैं। उनकी गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई।

उन्होंने यह भी पूछा कि यदि सरकार के पास सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी है तो उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में यह बात सामने आई है कि निविदा प्रक्रिया पहले से तय होती थी। पात्रता की शर्तें भी उसी के अनुरूप बदली जाती थीं। तेजस्वी ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा सत्ता के शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों की भूमिका की भी जांच होगी।

उन्होंने दो से 3.5 प्रतिशत कमीशन लेने की कथित व्यवस्था का उल्लेख करते हुए भ्रष्टाचार के प्रति सरकार के ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने' के दावे पर सवाल उठाया। RJD नेता ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या रिशु श्री और उससे जुड़ी कंपनियों को मिले सभी सरकारी ठेकों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाएगी।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिन कंपनियों को लाभ मिला, उनमें गुजरात की कंपनियों की संख्या अधिक होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जांच में अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं का खर्च उठाए जाने और महंगे उपहार दिए जाने जैसी बातें भी सामने आई हैं।

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