

बिहार के बक्सर जिले से चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरत में डाल दिया है। डुमरांव शहर के बीचोंबीच खड़ा 132 फीट ऊंचा मोबाइल टावर, भारी-भरकम जनरेटर और लाखों रुपये के उपकरण अचानक गायब हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने विशाल ढांचे को आखिर किसने और कैसे हटाया, जबकि आसपास घनी आबादी मौजूद थी। घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग यह समझ नहीं पा रहे कि इतना बड़ा ढांचा बिना किसी की जानकारी के आखिर कैसे हटाया जा सकता है। स्थानीय लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि 132 फीट ऊंचे लोहे के टावर को हटाने के लिए भारी मशीनों और श्रमिकों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में इतने बड़े ऑपरेशन का किसी की नजर में न आना कई सवाल खड़े करता है।
जानकारी के मुताबिक, जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का यह मोबाइल टावर कई वर्षों से बंद पड़ा था। हाल ही में कंपनी के अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी इसकी स्थिति का आकलन करने और मरम्मत की संभावनाएं देखने पहुंचे थे। लेकिन मौके पर पहुंचकर उन्हें बड़ा झटका लगा। जिस स्थान पर टावर स्थापित था, वहां न तो टावर मौजूद था और न ही उसके संचालन से जुड़े अन्य उपकरण।
कंपनी अधिकारियों के अनुसार, टावर के साथ 15 केवी क्षमता का जनरेटर और अन्य महत्वपूर्ण मशीनरी भी गायब मिली। इसके बाद अधिकारियों ने जमीन मालिक हरिनाथ यादव से संपर्क किया और मामले की जानकारी ली। बताया जा रहा है कि कंपनी और जमीन मालिक के बीच 12 वर्षों का लीज समझौता हुआ था, जिसकी अवधि वर्ष 2022 में समाप्त हो चुकी थी।
सूत्रों के अनुसार, समझौता समाप्त होने के बाद कंपनी की ओर से जमीन का किराया नियमित रूप से नहीं दिया गया था। इस संबंध में जमीन मालिक द्वारा कई बार नोटिस भी भेजे गए थे। हालांकि, जमीन मालिक ने टावर हटाने या चोरी होने की किसी भी जानकारी से इनकार किया है।
घटना की शिकायत डुमरांव थाने में दर्ज कराई गई है। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता बैजनाथ ओझा ने आरोप लगाया है कि कंपनी के स्वामित्व वाले टावर और अन्य उपकरणों को अज्ञात लोगों द्वारा हटा लिया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रही है। पुलिस अब जमीन मालिक, आसपास के लोगों और स्क्रैप कारोबारियों से भी पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि टावर को कब और किन परिस्थितियों में हटाया गया। फिलहाल इस रहस्यमयी मामले की असली कहानी पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
मुख्यालय डीएसपी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला जमीन किराया विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या टावर को कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया गया था या फिर इसे चोरी की नीयत से गायब किया गया।