बिहार में तीन तलाक के मामले में पहली सजा

बिहार में तीन तलाक के मामले में पहली सजा

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पटना :

बिहार में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत पहला ऐतिहासिक फैसला आया है। राजधानी पटना की एक अदालत ने अपनी पत्नी को तत्काल तीन तलाक देने के मामले में पति को 2 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन सहाय ने गुरुवार को नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के साथ ही IPC की धारा 323 और धारा 341 के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने अहमद पर 6,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर उसे 1 महीने और 22 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। हालांकि, अदालत ने उसे पत्नी पर तेजाब फेंकने की कोशिश के आरोप से बरी कर दिया।

शादी को 21 साल हो चुके थे :

फुलवारी शरीफ थाने में सितंबर 2022 में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, सिमरी गांव के निवासी अहमद ने उस साल 5 सितंबर को अपनी पत्नी को तीन तलाक दिया था। उस समय दोनों की शादी को करीब 21 साल हो चुके थे। उनके 3 बच्चे हैं। महिला ने आरोप लगाया था कि अहमद ने उसके एवं बच्चों के साथ मारपीट की थी। उस पर तेजाब फेंकने की कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में 31 जुलाई 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया था। अहमद के वकील शेखर कुमार ने कहा कि उनका मुवक्किल फिलहाल जमानत पर बाहर है। वह अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगा।

कैद और जुर्माने का प्रावधान :

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तत्काल तीन तलाक देना अवैध और अमान्य है। इस कानून में ऐसा करने वाले पति को 3 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान है। लोकसभा ने इस विधेयक को 25 जुलाई 2019 और राज्यसभा ने 30 जुलाई 2019 को पारित किया था। एजेंसियां
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