...जब स्पीच के दौरान ही माइक्रोफोन बंद होने से मंत्री हुए नाराज

...जब स्पीच के दौरान ही माइक्रोफोन बंद होने से मंत्री हुए नाराज
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कोलकाता : सत्रहवीं विधानसभा का अंतिम सत्र का अंतिम दिन शनिवार रहा। इस दिन कई अहम बिल पारित हुए। वहीं भाजपा तृणमूल के बीच बयानबाजी भी खूब हुई। इन सबके बीच एक और एक अभूतपूर्व घटना घटी। दरअसल, सत्र में चर्चा के दौरान संसदीय मामलों के मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय का माइक बंद करने से वह नाराज हो गये। माना जा रहा है कि इस कारण ही वह सदन छोड़कर अपने चेंबर में चले गये। हालांकि बाद में स्पीकर विमान बनर्जी ने मंत्री के कार्यालय जाकर उनसे बात की। राजनीतिक हलकों का मानना है कि स्पीकर द्वारा किसी मंत्री के घर जाकर बात करना विधानसभा के इतिहास में अभूतपूर्व घटना है।

कैसे क्या हुआ

बजट संबंधी विधेयक पर चर्चा के दौरान वक्ताओं की सूची में शोभनदेव चट्टोपाध्याय का नाम शुरू में नहीं था। आवास मंत्री अरूप विश्वास के अनुरोध पर स्पीकर ने उन्हें चार मिनट का समय दिया। विधानसभा नियम अनुसार , निर्धारित समय समाप्त होने से एक मिनट पहले वक्ता के सामने एक हरी बत्ती जलती है,और समय समाप्त होने पर लाल बत्ती जलती है और माइक्रोफोन बंद कर दिया जाता है। ऐसा ही हुआ। हालांकि यहां दावा किया गया कि समय से पहले ही हरी और लाल बत्तियां जल उठी और फिर माइक बंद हो गयी। अरूप विश्वास ने स्पीकर से समय बढ़ाने का अनुरोध किया। तब स्पीकर ने कहा कि आप मुझ पर दबाव नहीं डाल सकते हैं। वक्ता की सूची में नाम नहीं होने के बावजूद मैंने समय दिया। इस बातचीत के दौरान वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने टिप्पणी की कि विपक्षी विधायकों के साथ ऐसा नहीं किया जाता है। वहीं शोभनदेव सदन से निकल गये। धन्यवाद ज्ञापन में भी शामिल नहीं हुए हालांकि बताया गया है कि वह अपने तय कार्यक्रम में थे।

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