

सन्मार्ग संवाददाता
मिनाखां : उत्तर 24 परगना के मिनाखां में गुरुवार को चुनावी रैली के दौरान सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला और आगामी चुनाव को “बंगाल के अस्तित्व की लड़ाई” बताया। उन्होंने कहा, “राज्य में करीब 90 लाख वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं जो लोकतंत्र के खिलाफ है, इसके बावजूद भी हम जीतेंगे।”
ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा बंगाल में भी असम की तरह NRC लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा, असम में 19 लाख लोगों के नाम हटाकर उन्हें डिटेंशन कैंप में डाला गया था, जिनमें 13 लाख हिंदू और 6 लाख मुस्लिम थे। हम यहां डिटेंशन कैंप नहीं बनने देंगे। बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को नष्ट किया जा रहा है। 90 लाख नाम हटा दिए गए हैं, लेकिन याद रखो, इसके बावजूद हम जीतेंगे।
पूरे लोकतंत्र को चैत्र महीने की सेल की तरह बेच दिया गया है। हर कार्रवाई की प्रतिक्रिया होती है।” उन्होंने कहा, “एक गलत वोट से बंगाल अपनी पहचान, भाषा और अधिकार खो सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि “मैं खुद सुप्रीम कोर्ट में जाकर 32 लाख लोगों के नाम जुड़वा चुकी हूं। आगे सभी के नाम जुड़वाऊंगी। मेरी चिंता है कि अगर नाम वोट के बाद जुड़ेंगे, तो लोग वोट नहीं दे पाएंगे।” सीएम ने कहा, अन्य राज्यों में बंगालियों को अपमानित किया जाता है, जबकि भाजपा “सोनार बांग्ला” बनाने की बात करती है। ममता ने दावा किया कि ओडिशा में भी हाल ही में बंगालियों पर अत्याचार हुआ है।
उन्होंने कहा, “आने वाले समय में लोगों का अस्तित्व रहेगा या नहीं, बंगाल का अस्तित्व रहेगा या नहीं, हिंदू-मुस्लिमों की भाषा बचेगी या नहीं, आदिवासी, मतुआ और नमोशूद्र सभी समुदायों का अस्तित्व रहेगा या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है। भाजपा चाहती है कि लोग वोट ही न दे सकें। लोग आपको कभी माफ नहीं करेंगे।” उन्होंने खाने-पीने की आजादी का मुद्दा उठाते हुए कहा, “कौन क्या खाएगा, यह तय करने का अधिकार लोगों का है।” सभा से उन्होंने चेतावनी दी कि पैसे देकर लोगों को रैलियों में लाया जा रहा है और एजेंसियों के जरिए खातों में पैसा डालकर बाद में कार्रवाई की जा सकती है। अंत में, उन्होंने कहा कि 2026 का चुनाव सिर्फ सरकार बनाने का नहीं, बल्कि संविधान और बंगाल की पहचान बचाने की लड़ाई है।