

कोलकाता : मौसम की बेरुखी ने आलू किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। एक तरफ किसानों को अपनी मेहनत और लागत डूबने का डर सता रहा है, तो दूसरी तरफ दोबारा आलू की खेती शुरू करने के लिए जरूरी पैसों की भी कमी हो रही है।
किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि बारिश से हुए नुकसान की भरपाई कैसे की जाए। जिन किसानों की फसल प्रभावित हुई है, उनके लिए दोबारा आलू के बीज की बुवाई करना भी आसान नहीं रह गया है। खेती में पहले ही काफी पूंजी लग चुकी है और अब नई फसल के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना चुनौती बन गया है।
दोबारा आलू की बुवाई संभव या नहीं? उत्पादन पर पड़ सकता है असर
किसानों को आशंका है कि यदि मौसम की स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो इस साल आलू के कुल उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। खेतों में बारिश से हुए नुकसान के बाद दूसरी बार बुवाई करने का समय और आर्थिक स्थिति, दोनों ही उनके लिए चिंता का विषय हैं।
किसानों का कहना है कि एक ओर प्राकृतिक आपदा ने उनकी कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी ओर नई खेती के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रभावित किसान दोबारा खेती शुरू कर पाएंगे या नहीं।
फिलहाल किसान मौसम के सुधरने और नुकसान से उबरने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर न केवल किसानों की आमदनी, बल्कि आगामी दिनों में बाजार में आलू की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।