तीस्ता खतरे के निशान से ऊपर, डर ही डर

कई इलाके जलमग्न, अनेक लोग बेघर, प्रशासन के माथे पर बल - गजलडोबा से चरणबद्ध पानी छोड़े जाने के बाद घर-सड़क डूबे; 2023 की तबाही और 2024 के कटाव का डर फिर लौटा
तीस्ता खतरे के निशान से ऊपर, डर ही डर
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फिलहाल रात करीब 10 बजे के बाद जलस्तर नहीं बढ़ने से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन तीस्ता किनारे बसे परिवारों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। वजह यह है कि इस नदी का मिजाज अचानक बदलता रहा है। इस बार भी लोगों की नजर आसमान पर है और तीस्ता के जलस्तर पर भी—क्योंकि पानी का बढ़ना यहां सिर्फ जलस्तर का आंकड़ा नहीं, बल्कि घर, सड़क, खेत और रोजमर्रा की जिंदगी पर मंडराता खतरा है।

सिलीगुड़ी : तीस्ता नदी एक बार फिर उत्तर बंगाल के लोगों को डराने लगी है। पहाड़ और समतल में लगातार भारी बारिश के बीच तीस्ता के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद गाजोलडोबा स्थित तीस्ता बैराज से चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा गया। इसके बाद जलपाईगुड़ी शहर से सटे सुकांत नगर कॉलोनी के निचले हिस्से में नदी का पानी घुस गया। देखते ही देखते सड़कें और फुटबॉल मैदान घुटने तक पानी में डूब गये, जबकि कुछ घरों में भी पानी प्रवेश कर गया। शाम से बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी हैलेकिन तीस्ता के तेवर पर नजर बनी हुई है। मौजूदा स्थिति ने उन पुराने जख्मों को भी ताजा कर दिया है, जब यही नदी बस्तियों, खेतों और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को अपने साथ बहा ले गयी थी।

2023 में तीस्ता लाई थी भारी तबाही

तीस्ता का सबसे भयावह चेहरा अक्टूबर 2023 में सामने आया था। सिक्किम में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के बाद तीस्ता में अचानक बाढ़ आयी और इसका असर सिक्किम से लेकर उत्तर बंगाल के मैदानी इलाकों तक पहुंचा। जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कूचबिहार तक बाढ़ का असर दर्ज किया गया। उस बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहा था। गजलडोबा से चापाडांगा तक तीस्ता के किनारे करीब 22 किलोमीटर के इलाके में खेतों पर रेत और गाद की मोटी परत जम गयी थी। कई किसानों की जमीन की उत्पादकता प्रभावित हुई और खेती-किसानी लंबे समय तक पटरी पर नहीं लौट सकी।

2024 में भी कटाव ने लील लिए कई घर

जुलाई 2024 में जलपाईगुड़ी जिला में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ तेज कटाव ने भी भारी नुकसान किया था। राजगंज ब्लॉक के ललटोंग गांव में करीब 36 परिवारों के घर नदी कटाव की चपेट में आकर उजड़ गये थे। चामकडांगी इलाके के लोग भी रातों की नींद खोकर नदी के कटाव को देखते रहे। मयनागुड़ी के बाराघरिया में तीस्ता पर बना सुरक्षात्मक स्पर भी क्षतिग्रस्त होकर बह गया था।

हर मानसून में वही सवाल - पानी कहां जाएगा?

तीस्ता की यही दोहरी मार एक तरफ अचानक बढ़ता जलस्तर और दूसरी तरफ नदी का लगातार कटाव, निचले इलाकों में बसे लोगों के लिए बड़ा संकट बनती जा रही है। मानसून के दौरान तीस्ता की सहायक नदियों से आने वाला अतिरिक्त पानी भी जलस्तर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

सुकांतनगर में मौजूदा जलभराव ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है—क्या हर बार पानी बढ़ने के बाद ही बचाव की तैयारी होगी, या नदी के व्यवहार को पहले से समझकर स्थायी समाधान तैयार किया जाएगा? खड़िया ग्राम पंचायत की प्रधान जया सरकार विश्वास और उपप्रधान महादेव राय ने जलमग्न इलाके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी रखी गयी हैं।

फिलहाल रात करीब 10 बजे के बाद जलस्तर नहीं बढ़ने से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन तीस्ता किनारे बसे परिवारों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। वजह यह है कि इस नदी का मिजाज अचानक बदलता रहा है। इस बार भी लोगों की नजर आसमान पर है और तीस्ता के जलस्तर पर भी—क्योंकि पानी का बढ़ना यहां सिर्फ जलस्तर का आंकड़ा नहीं, बल्कि घर, सड़क, खेत और रोजमर्रा की जिंदगी पर मंडराता खतरा है।

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