

शांतिनिकेतन : विश्वभारती परिसर को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक अनोखी पहल की तैयारी है। परिसर से निकलने वाले प्लास्टिक और अन्य कचरे का इस्तेमाल कर पेट्रोलियम आधारित ईंधन और गैस तैयार करने का प्रस्ताव दिया गया है।
यह प्रस्ताव विश्वभारती के पूर्व छात्र और वैज्ञानिक पुण्यव्रत चक्रवर्ती ने विश्वविद्यालय के सामने रखा है। प्रारंभिक स्तर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस पहल में रुचि दिखाई है।
शांतिनिकेतन के सीमांतपल्ली निवासी पुण्यव्रत चक्रवर्ती वर्ष 2008 से प्लास्टिक से ईंधन तैयार करने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। लंबे शोध के बाद उन्होंने 2018 में पेटेंट के लिए आवेदन किया और उनके अनुसार 2021 में भारत सरकार से उनके आविष्कार को मान्यता मिली।
वे विश्वभारती के शिक्षासत्र के पूर्व छात्र रहे हैं। बाद में शिक्षाभवन के रसायन विभाग से पढ़ाई करने के साथ एनालिटिकल केमिस्ट्री में पीएचडी की। इसके बाद इंडियन ऑयल में काम किया और तेल शोधन परियोजनाओं से जुड़े रहे।
पुण्यव्रत के अनुसार, उनकी तकनीक में गर्मी की मदद से प्लास्टिक को गैस और तरल पदार्थ में बदला जाता है। इसके बाद शुद्धीकरण और ठंडा करने की प्रक्रिया से दोनों को अलग किया जाता है।
तैयार उत्पाद का इस्तेमाल रसोई गैस और ईंधन तेल के रूप में किया जा सकता है। कोलकाता में उनकी तकनीक के दो पायलट प्लांट पर काम चल रहा है। कुछ किलोग्राम प्लास्टिक से तैयार ईंधन से जनरेटर और वैन चलाकर परीक्षण भी किया गया है।
योजना के तहत केवल मुख्य परिसर ही नहीं, बल्कि हॉस्टल, क्वार्टर, फार्म और विश्वभारती के अधीन आने वाले गांवों से निकलने वाले कचरे को भी परियोजना में शामिल करने की तैयारी है। कचरे की मात्रा के अनुसार मशीनें लगाने की योजना है।
हाल में पुण्यव्रत ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने परियोजना का प्रस्तुतीकरण दिया। कुलपति प्रवीर कुमार घोष ने बताया कि करीब एक महीने के भीतर प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। लक्ष्य पूरे परिसर को पॉलिथीन मुक्त बनाना है।