मुनि श्री जिनेश कुमार ने प्रस्तुत किए ‘अवधान’ के विलक्षण प्रयोग

स्मृति और गणित का अद्भुत संगम
Howrah
मुनि श्री जिनेश कुमार
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हावड़ा : युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में ‘स्मृति विद्या का विलक्षण प्रयोग—अवधान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा की ओर से यह कार्यक्रम योगक्षेम विहार स्थित योगक्षेम सभागार में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने स्मृति, एकाग्रता और गणित पर आधारित अवधान विद्या के विभिन्न प्रयोग प्रस्तुत किए। उनके प्रदर्शन ने उपस्थित लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। जटिल गणितीय सवालों का समाधान बिना कागज-पेन और कैलकुलेटर के केवल स्मरण शक्ति एवं मानसिक गणना के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

तारीख बताने पर तत्काल बताया वार

अवधान के प्रयोग के दौरान एक प्रश्नकर्ता ने मुनि श्री को ईस्वी सन्, महीना और तारीख बताई, जिसके आधार पर उन्होंने तत्काल उस दिन का वार बता दिया। वहीं, एक अन्य प्रश्नकर्ता ने 16 खानों वाले सर्वतोभद्र यंत्र को भरने के लिए 71 अंक दिए। मुनि श्री ने कुछ ही समय में पूरे यंत्र को भर दिया और चारों दिशाओं से गणना करने पर निर्धारित संख्या प्राप्त हुई।

कार्यक्रम में घड़ी में मन ही मन सोचे गए समय को बताने का प्रयोग भी किया गया। मुनि श्री ने गणितीय सूत्र के आधार पर तत्काल समय बता दिया।

माला के मनके की भी सटीक जानकारी

अवधान के प्रयोगों में एक ऐसा प्रदर्शन भी हुआ, जिसने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। मुनि श्री ने बताया कि माला का मनका किस व्यक्ति के किस हाथ, किस अंगुली, किस पोर और किस मनके पर है।

इसके अलावा हजारों की संख्या से जुड़े गुणा के सवालों को केवल सुनकर मानसिक रूप से हल किया गया और छिपे हुए अंकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के समापन पर मुनि श्री ने पूरे कार्यक्रम के दौरान सुने गए श्लोक, 24 अंकों की लंबी संख्या तथा अलग-अलग भाषाओं के पांच शब्दों को ज्यों का त्यों दोहराया। उन्होंने घनमूल निष्कासन का प्रयोग भी प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों के बाद पूरा सभागार ‘ओम अर्हम्’ की ध्वनि से गूंज उठा।

‘स्मृति विकास जीवन की सफलता का महत्वपूर्ण सूत्र’

प्रयोगों के बाद अपने उद्बोधन में मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कहा कि जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्रों में स्मृति विकास प्रमुख है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मस्तिष्क अत्यंत अनमोल है और इसे सुपर कंप्यूटर की तरह माना जा सकता है, लेकिन आज व्यक्ति अपनी अनेक मानसिक क्षमताओं के लिए कंप्यूटर पर अधिक निर्भर हो गया है।

मुनि श्री ने बताया कि अवधान स्मृति विकास का एक महत्वपूर्ण उपागम है। एकाग्रता की साधना के माध्यम से अनेक क्षमताओं का विकास किया जा सकता है। उन्होंने अवधान को ऐसी साधना बताया, जिसमें ज्ञात-अज्ञात अथवा परिचित बातों और वस्तुओं को एकाग्र मन से स्मृति में धारण किया जाता है। इसके अभ्यास से लंबी संख्याओं, श्लोकों और अन्य जानकारियों को याद रखने की क्षमता विकसित की जा सकती है।

मंगलाचरण से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत मुनि श्री कुणाल कुमार जी के मंगलाचरण से हुई। इस अवसर पर बुधमल लुनिया, बसंत पटावरी, सुजाता दुगड़, रणजीत सेठिया और मुदित कोठारी ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का संचालन मुनि श्री परमानंद जी ने किया, जबकि सभा के मंत्री विनीत कोठारी ने उपस्थित अतिथियों, श्रद्धालुओं एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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