

सिलीगुड़ी: दुर्गापूजा से पहले सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चिकन नेक कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुक्रवार को सिलीगुड़ी के गुरंग बस्ती स्थित महानंदा पुल के नीचे नदी किनारे विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त मॉक ड्रिल की। इस अभ्यास में ड्रोन हमले जैसी संभावित आपात स्थितियों से निपटने, त्वरित कार्रवाई करने और बचाव एवं राहत अभियान चलाने की तैयारियों को परखा गया।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 46वीं बटालियन के नेतृत्व में आयोजित इस अभ्यास में बीएसएफ, पुलिस, सेना और खुफिया ब्यूरो (आईबी) समेत संबंधित एजेंसियों के जवानों ने हिस्सा लिया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी अप्रत्याशित घटना के दौरान सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता, आपसी समन्वय और संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की क्षमता का आकलन करना था।
आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पर जोर
मॉक ड्रिल के दौरान संभावित ड्रोन हमले और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण पुल से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न परिस्थितियों में कार्रवाई की तैयारी का परीक्षण किया गया। इसमें त्वरित प्रतिक्रिया, बचाव एवं राहत कार्यों तथा खतरे में फंसे लोगों और सुरक्षाकर्मियों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस दौरान बीएसएफ सेक्टर मुख्यालय के डीआईजी हरपाल सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने अभ्यास का निरीक्षण कर सुरक्षा बलों की तैयारियों का जायजा लिया। अभ्यास के जरिए यह परखा गया कि किसी आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियां कितनी तेजी से एकजुट होकर कार्रवाई कर सकती हैं।
हर महीने अलग-अलग क्षेत्रों में होता है अभ्यास
पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में डीआईजी हरपाल सिंह ने बताया कि सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए इस तरह के अभ्यास नियमित रूप से किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में हर महीने मॉक ड्रिल आयोजित करने का उद्देश्य आपात परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सिलीगुड़ी और चिकन नेक कॉरिडोर की सामरिक अहमियत को देखते हुए त्योहारों के दौरान सुरक्षा और सतर्कता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संयुक्त मॉक ड्रिल को इसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।