बंगाली प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए लड़ूंगा : अधीर
कोलकाता/ ओडिशा : कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने रविवार को ओडिशा के संबलपुर में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों से मुलाकात की और आरोप लगाया कि उन्हें डराया-धमकाया गया है और स्थानीय पुलिस या राज्य सरकार के खिलाफ बोलने से मना किया गया है। उन्होंने कहा कि "मैं विभिन्न राज्यों में काम कर रहे बंगाली प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए लड़ूंगा।" चौधरी ने कुछ राज्यों में “समानांतर पुलिसिंग” पर चिंता व्यक्त की, जहां बंगाली मजदूरों से निजी व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर उनकी पहचान का प्रमाण मांगा जा रहा है। चौधरी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से इस प्रथा को रोकने का आग्रह किया। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र से पांच बार के पूर्व सांसद चौधरी ने कहा कि उन्होंने प्रवासी श्रमिकों को यह आश्वासन भी दिया है कि कांग्रेस उनके साथ है। ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने यहां कुछ प्रवासी श्रमिकों से मुलाकात की। हालांकि, वे दबाव में थे, उन्हें धमकी दी गई थी कि वे अपनी समस्याओं के बारे में मुझसे बात ना करें और स्थानीय पुलिस और राज्य सरकार के खिलाफ एक भी शब्द ना बोलें।’’ चौधरी ने कहा कि उनके संबलपुर पहुंचने से काफी पहले ही प्रवासी श्रमिकों को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया था।
‘‘पीड़ित लोग भयभीत थे और उन्हें डराया-धमकाया गया‘‘
उन्होंने कहा, ‘‘पीड़ित लोग भयभीत थे और उन्हें डराया-धमकाया गया था। पुलिस ने उन्हें मेरे दौरे के दौरान मेरे सामने पेश नहीं होने के लिए कहा था। श्रमिकों को यह भी निर्देश दिया गया था कि वे अपनी समस्याओं के बारे में किसी भी प्रकार की शिकायत ना करें।’’ चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रवासी श्रमिकों को "मौखिक रूप से धमकी" दी गई थी और कहा, "इतना ही नहीं, जिन ठेकेदारों की देखरेख में वे काम कर रहे हैं, उन्हें भी धमकाया गया है।
बंगाली श्रमिकों के मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष उठा चुके हैं
लोकसभा में कांग्रेस के पूर्व नेता चौधरी ने बताया कि वह बंगाली श्रमिकों के मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष उठा चुके हैं। चौधरी ने यह भी कहा कि वे इस मामले को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, संबलपुर सांसद एवं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के संज्ञान में लाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने मुर्शिदाबाद के जंगीपुर के रहने वाले 30 वर्षीय बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिक ज्वेल राणा की पिछले महीने संबलपुर में बीड़ी को लेकर हुए विवाद में हत्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया गया था कि हमलावरों ने राणा को बांग्लादेशी घुसपैठिया होने का संदेह जताते हुए उसे आधार कार्ड दिखाने को कहा था। हालांकि स्थानीय पुलिस ने इस आरोप का खंडन किया है। चौधरी ने कहा, ‘‘कुछ राज्यों में समानांतर पुलिसिंग व्यवस्था चल रही है, जहां निजी व्यक्ति प्रवासी श्रमिकों से पहचान पत्र दिखाने को कह रहे हैं। इसे रोका जाना चाहिए और पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी प्रवासी श्रमिक को बांग्लादेशी घुसपैठिया होने के संदेह में गुंडों द्वारा परेशान ना किया जाए।’’

