विश्वभर के इस्कॉन मंदिरों में दीपदान महोत्सव का आयोजन 26 अक्टूबर से

एक माह तक चलेगा विशेष कार्यक्रम, प्रतिदिन शाम 7 से 8 बजे तक श्रद्धालु कर सकेंगे निःशुल्क दीप अर्पित
Mayapur
इस्कॉन मंदिरों में होगा दीपदान महोत्सव
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मायापुर/ कोलकाता : भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, आध्यात्मिक चेतना और कार्तिक मास की पावन परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी विश्वभर के इस्कॉन मंदिरों और शाखा केंद्रों में दीपदान महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

इस्कॉन के प्रमुख केंद्र श्री मायापुर चंद्रोदय मंदिर सहित विभिन्न देशों में स्थित मंदिरों में यह विशेष धार्मिक कार्यक्रम 26 अक्टूबर, सोमवार से प्रारंभ होगा। आयोजन कार्तिक मास की पावन अवधि में प्रतिदिन चलेगा और इसका समापन 24 नवंबर, मंगलवार को रास पूर्णिमा के अवसर पर होगा।

इस एक माह तक चलने वाले दीपदान महोत्सव में जाति, धर्म, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से परे सभी श्रद्धालुओं को भाग लेने का अवसर मिलेगा। आयोजन में दीपदान पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। श्रद्धालु निर्धारित समय पर मंदिर पहुंचकर भगवान के समक्ष दीप अर्पित कर सकेंगे और भक्ति भाव से धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बन सकेंगे।

प्रतिदिन शाम 7 से 8 बजे तक होगा दीपदान

इस्कॉन केंद्रों में दीपदान कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 8 बजे तक आयोजित किया जाएगा। दीपदान के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की दामोदर लीला के स्मरण में दामोदराष्टकम् का सामूहिक पाठ भी होगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर अपनी श्रद्धा और भक्ति अर्पित करेंगे।

कार्तिक मास में दीपदान और दामोदराष्टकम् के पाठ का वैष्णव परंपरा में विशेष महत्व है। इस अवधि में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण किया जाता है तथा भक्त उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इस्कॉन के मंदिरों में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना, भक्ति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना है।

देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना

प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी दीपदान महोत्सव में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है। मायापुर सहित विभिन्न इस्कॉन केंद्रों में हजारों भक्त इस पावन अनुष्ठान में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष दीप अर्पित करते हैं।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुचारु व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ रखा जाएगा, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण में दीपदान और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले सकें।

आयोजकों की ओर से इस महोत्सव को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और सभी श्रद्धालुओं को इसमें सहभागी बनने का अवसर प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जाता है।

भगवान की प्रसन्नता और आध्यात्मिक शांति के लिए दीपदान

वैष्णव परंपरा में दीपदान को भगवान के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। कार्तिक मास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को दीप अर्पित करने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में दीपदान और भगवान के नाम का स्मरण करने से आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है तथा मन में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है।

दीपदान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकाश, आनंद, प्रेम और एकता का प्रतीक भी है। दीपक की लौ अंधकार को दूर करने के साथ-साथ मनुष्य को अपने जीवन में ज्ञान, सदाचार और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है।

दामोदराष्टकम् पाठ से भक्तिमय होगा मंदिर परिसर

दीपदान महोत्सव के दौरान दामोदराष्टकम् का पाठ विशेष आकर्षण रहेगा। श्रीकृष्ण भक्तों के लिए दामोदराष्टकम् का विशेष धार्मिक महत्व है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, विशेषकर माता यशोदा द्वारा उन्हें रस्सी से बांधने की लीला का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।

कार्तिक मास में इस स्तुति का पाठ करते हुए श्रद्धालु भगवान दामोदर की आराधना करते हैं। इस्कॉन मंदिरों में दीपदान के साथ दामोदराष्टकम् का पाठ भक्तिमय वातावरण का निर्माण करता है और भक्तों को भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है।

प्रेम, आनंद और प्रकाश का संदेश देता है दीपदान महोत्सव

दीपदान महोत्सव का मूल संदेश जीवन से अंधकार को दूर कर ज्ञान, भक्ति और सकारात्मकता के प्रकाश को स्थापित करना है। यह आयोजन लोगों को आपसी प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक एकता की भावना से जोड़ता है।

दीप अर्पित करने की परंपरा के माध्यम से श्रद्धालु भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा कल्याण की कामना करते हैं।

इस्कॉन के इस वैश्विक आयोजन के माध्यम से कार्तिक मास की वैष्णव परंपरा को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है। विभिन्न देशों में स्थित मंदिरों और केंद्रों में होने वाले कार्यक्रम श्रद्धालुओं को एक साझा आध्यात्मिक मंच प्रदान करते हैं।

दीपदान महोत्सव के अवसर पर यही मंगलकामना की जाती है कि अज्ञान और नकारात्मकता का अंधकार दूर हो तथा प्रत्येक व्यक्ति के मन-मंदिर में भक्ति, प्रेम और ज्ञान का दीप प्रज्वलित हो।

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