

सांकतोड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) द्वारा जारी उस पत्र के बाद, जिसमें तीन वर्ष से कम सेवा वाले नए भर्ती कर्मचारियों को रविवार, अवकाश और ओवरटाइम ड्यूटी से वंचित करने का निर्देश दिया गया है। अब यह मामला यूनियन बनाम प्रबंधन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस मामले में महाप्रबंधक कार्मिक एवं औद्योगिक संबंध पुण्यदीप भट्टाचार्य ने पत्र जारी किया है। पत्र जारी होते ही नए भर्ती हुए कर्मियों के बीच खलबली मच गई है। ईसीएल के प्रमुख श्रमिक यूनियनों ने इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया है।
यूनियनों का आरोप -आय पर सीधा प्रहार
यूनियनों ने कहा कि नए भर्ती कर्मचारी पहले से ही सीमित वेतन और सुविधाओं में काम कर रहे हैं। ओवरटाइम और छुट्टी की ड्यूटी से मिलने वाला भत्ता उनकी आमदनी का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इस आदेश से उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। यूनियनों का कहना है कि बिना चर्चा और सहमति के इस तरह का आदेश जारी करना औद्योगिक संबंधों की भावना के खिलाफ है। यूनियन नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सुरक्षा ही कारण है, तो फिर उचित प्रशिक्षण और निगरानी के साथ सीमित ओवरटाइम की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती। उनका आरोप है कि सुरक्षा की आड़ में कर्मचारियों के कानूनी और संविदात्मक अधिकारों में कटौती की जा रही है।
ऑपरेशंस पर असर का भी दावा
यूनियनों के अनुसार, इस आदेश से खदानों और परियोजनाओं में मैनपावर मैनेजमेंट बिगड़ सकता है। रविवार और छुट्टी के दिन काम कराने में पहले से ही दिक्कत होती है। अब नए कर्मचारियों को हटाने से अनुभवी कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जिससे उत्पादन प्रभावित होना तय है। यूनियनों ने साफ कहा है कि यदि इस आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो वे इसे लेकर आंदोलनात्मक कदम भी उठा सकते हैं।
प्रबंधन ने क्या कहा ?
प्रबंधन सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय नियम, सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षण अवधि को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और इसका उद्देश्य किसी भी कर्मचारी का नुकसान करना नहीं है। स्पष्ट है कि ईसीएल के इस फैसले ने नए कर्मचारियों की सेवा शर्तों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रबंधन - यूनियन टकराव का रूप ले सकता है।