2.5 करोड़ की ठगी करने वाले 2 अभियुक्तों को जेल

2.5 करोड़ की ठगी करने वाले 2 अभियुक्तों को जेल
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आसनसोल : आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना 2 करोड़ 53 लाख 14 हजार 437 रुपये की ठगी करने से संबंधित मामले में 2 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उन्हें रिमांड पर लिया था। रिमांड पर लिए गए अभियुक्तों में तेलंगाना राज्य के बोरुगला प्रसाद तथा अककेति रामू शामिल हैं। वहीं उनकी रिमांड अवधि समाप्त होते ही उन्हें पुनः मंगलवार को आसनसोल जिला अदालत के सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने अभियुक्तों की जमानत अर्जी रद्दकर उन्हें अगली सुनवाई होने तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।

क्या था पूरा मामला ?

कुछ महीनों पहले शिकायतकर्ता को एक नंबर से एक कॉल आया था। फोन करने वाले ने अपना परिचय देते हुए कहा था कि वह एक अकाउंट कंपनी की निवेश विशेषज्ञ आराध्या मिश्रा हैं, जो SEBI में पंजीकृत हैं तथा उच्च लाभ वाले निवेशों में लेन-देन करने के लिए अधिकृत हैं। उनकी बातों और SEBI से संबंधित कंपनी के दस्तावेजों को देखने के बाद शिकायतकर्ता उनकी बातों में आ गए तथा उनके निर्देशों के अनुसार अपने सभी दस्तावेज जमा करके 50 हजार रुपये का पहला निवेश कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने निकासी के लिए उनके ग्राहक सेवा केंद्र से बात की, कारण उस समय शिकायतकर्ता को भरोसा नहीं हुआ था। उन्हें बाद में पता चला कि वे जालसाजों की चाल में फंस गये हैं। बता दें कि बीते वर्ष 5 मई को शिकायतकर्ता को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जिसे कुछ व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो एक सेबी द्वारा अधिकृत वित्तीय फर्म के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे। उन्होंने कथित सेबी पंजीकरण दस्तावेज उपलब्ध कराए और आईपीओ, ओटीसी और शेयर निवेश के माध्यम से उच्च लाभ का वादा करते हुए उनसे एक ऐप इंस्टॉल करने के लिए राजी किया गया। वहीं उन्हें प्लेटफॉर्म की वैधता के बारे में झूठा आश्वासन भी दिया गया। उसके बाद उन्होंने 21 मई से 20 जून के बीच कुल 2 करोड़ 53 लाख 14 हजार 437 रुपये का निवेश किया, जबकि 20 जून को उन्होंने कुछ रुपये निकालने का प्रयास किया था। हालांकि सबसे पहले उनके खाते में एक हजार रुपये जमा किए गए, जिसका उद्देश्य उनके बैंक खाते की पुष्टि करना था। इसके बाद, निकासी प्रक्रिया के लिए उनसे 10 फीसदी सेवा शुल्क जमा करने को कहा गया। उन्हें यह धोखाधड़ी का संकेत लगा था, इसलिए उन्होंने इनकार कर दिया। वहीं पुष्टि हुई कि यह ऐप एक साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा था।

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