राज्य सरकार ने आसनसोल नगर निगम का बोर्ड को किया भंग

आम नागरिकों को सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने का आरोप/बोर्ड बैठक का आयोजन नहीं होने के कारण बढ़ी परेशानी
राज्य सरकार ने आसनसोल नगर निगम का बोर्ड को किया भंग
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आसनसोल : लगातार पार्षदों के इस्तीफे और विभिन्न प्रशासनिक अनियमितताओं एवं निगम क्षेत्र में बदहाल व्यवस्था का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने आसनसोल नगर निगम बोर्ड को बर्खास्त कर दिया। राज्य सरकार ने बोर्ड भंग करते ही निगम संचालन के लिए आईएएस अदिति चौधरी को निगम का प्रशासक नियुक्त कर दिया है। बता दें कि अदिति चौधरी पहले भी निगम की कमिश्नर रह चुकी हैं। गौरतलब है कि कुछ माह पहले राज्य सरकार और नगर निगम के बीच एक पत्र को लेकर विवाद सामने आया था। वहीं राज्य सरकार द्वारा पत्र के माध्यम से कहा गया था कि नगर निगम में पिछले 2 माह से बोर्ड मीटिंग नहीं हो रही है और नगर निगम पर आम नागरिकों को संतोषजनक तरीके से नागरिक सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने की शिकायतें भी लगातार आरहे हैं। इस स्थिति में बोर्ड को क्यों नहीं भंग कर दिया जाये। वहीं मेयर बिधान उपाध्याय का दावा है कि राज्य सरकार के उस पत्र का जवाब भी दिया गया था पर उसे नहीं माना गया। वहीं बुधवार को बोर्ड भंग होते ही नगर निगम कार्यालय से मेयर, चेयरमैन, उपमेयर एवं एमएमआईसी के कार्यालय के सामने से उनके नेम प्लेट को हटा दिया गया। इसके साथ ही निगम कार्यालय गेट पर भाजपा का झंडा भी लगा दिया गया।

बोर्ड भंग होने के क्या है कारण

आसनसोल नगर निगम में पिछले काफी समय से गतिरोध की स्थिति बनी हुई थी। निगम प्रशासन पर लंबे समय से बोर्ड की कोई भी बैठक नहीं करने और संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) अवैध रूप से माफ करने जैसे कई गंभीर आरोप लग रहे थे। विभिन्न शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए राज्य के नगर विकास विभाग के सचिव ने नगर निगम को एक कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किया था। मंत्रालय का कहना है कि नगर निगम प्रशासन की ओर से इस नोटिस का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, जिसके बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए पूरे पूरे बोर्ड को ही भंग करने का निर्णय लिया। आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि कोई भी पार्षद अपने वार्ड में काम नहीं कर रहा था और जनता का पार्षद से बात नहीं हो पा रही थी, तो बोर्ड भंग होना तय था।

क्या कहा मेयर ने

आसनसोल नगर निगम के मेयर बिधान उपाध्याय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जो पत्र दिया गया था, उसका उन्होंने जवाब भी दिया था। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा भी था कि चुनाव के नतीजे के कारण मई माह से बैठक नहीं हो पायी थी, कारण आसनसोल की राजनीतिक स्थिति खराब थी। नगर निगम के सभी वार्डों में पार्षदों के द्वारा सेवा दी जा रही है पर अचानक इस तरह से नगर निगम का बोर्ड भंग करना उचित नहीं है, यह एक गणतांत्रिक अधिकार का हनन है।


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