चांदी के रथ पर सवार होते हैं सोने के जगन्नाथ, बलराम व सुभद्रा

पुलिस की कड़ी सुरक्षा में निकाली गई रथयात्रा
चांदी के रथ को सजाते श्रद्धालु
चांदी के रथ को सजाते श्रद्धालु
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मुर्शिदाबाद : 250 साल से भी ज्यादा पुराने नसीपुर अखाड़े की रथ यात्रा को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ जिले के लोगों में भी उस दौरान खुशी और उत्साह का माहौल बन जाता है। इस अखाड़े की रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण चांदी का रथ होता है। चांदी के रथ में भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को देखने के लिए जिले और जिले के बाहर से बड़ी संख्या में लोग नसीपुर पहुंचते हैं। सीधे और उल्टे रथ वाले दिन, दोपहर में सोने के जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा चांदी के रथ में सड़क पर सवार होकर निकलते हैं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सड़क पर कुछ समय बिताने के बाद, वे शाम होने से पहले अखाड़े में लौट आते हैं। अखाड़े के अधिकारियों की जानकारी के अनुसार, मोहंत लक्ष्मण दास आचारी ने लगभग 1760 वर्ष में जाफरागंज अखाड़े की स्थापना की थी। हालांकि, अखाड़े में रथ यात्रा उत्सव अगले मोहंत चतुर्भुजदास आचारी के समय में शुरू हुआ। उन्होंने लकड़ी के दो रथ बनाकर रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत की। वहीं वर्ष 1825 के आसपास मोहंत भगवानदास आचार्य के समय में चांदी का रथ चलन में आया। राजस्थान से कारीगर बुलाए गए और चांदी के रथ बनवाए गए। कहा जाता है कि उस समय जाफरागंज अखाड़े के रथयात्रा उत्सव के दौरान नवाब और स्थानीय जमींदार और उनके परिवार के सदस्य चांदी के रथ को देखने आते थे। अखाड़े के रथयात्रा उत्सव के आसपास सात दिनों तक नशीपुर में एक गांव का मेला लगता था। वहीं रथ यात्रा के दिन चांदी के रथ को कड़ी पुलिस सुरक्षा में सड़क पर ले जाया जाता है।

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