

आसनसोल : बारिश का मौसम आते ही रेलपार के निचले इलाके के लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। लोग बार-बार नदी किनारे खड़े होकर नदी के जलस्तर को निहार रहे हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों की रातों की नींद हराम होने लगी है। बीते दो दिनों से हो रही बारिश के कारण गारुई नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। हर साल बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने से रेलपार के विभिन्न इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने से हजारों लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। लोगों को अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लेना पड़ता है। रेलपार के लोगों को बाढ़ जैसी भयावह स्थिति से बचाने के लिए स्थायी समाधान हेतु तृणमूल शासनकाल में आसनसोल नगर निगम की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर नदी की सफाई की गई। नदी की गहराई बढ़ाने के लिए नदी के नीचे की मिट्टी काटकर हटाया गया, ताकि लोगों को बाढ़ जैसी स्थिति से जूझना न पड़े। 2025-26 में रेलपार के कसाई मुहल्ला बाजार के पास स्थित लोहा पुल और एनआरआर रोड स्थित सिद्दीक पुल को तोड़कर करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से वृहद ब्रिज का निर्माण किया गया। सनद रहे कि बारिश में दोनों पुल पानी में डूब जाने के कारण रेलपार का आवागमन ठप हो जाता था। इलाके का संपर्क शहर से टूट जाता था। नगर निगम की ओर से 30 करोड़ की लागत से गारुई नदी की सफाई सृष्टि नगर से लेकर घाघरबूड़ी चंडी माता मंदिर तक की गई थी, लेकिन लोगों की लापरवाही से नदी में कचरा जमा हो गया है जो नदी में फिर से बाढ़ जैसी स्थिति का संकेत दे रहा है। सनद रहे कि तत्कालीन मेयर बिधान उपाध्याय ने खुद नदी का निरीक्षण कर नदी की सफाई कराने के बाद उसके दोनों ओर पौधे लगाकर घेराबंदी कर सुंदरीकरण की बात कही थी। लोगों से आग्रह किया था कि वे लोग घर के कचरे को नदीं में फेंक कर उसे जाम न करें।
बाढ़ के लिए स्थानीय लोग जिम्मेवार
गारुई नदी की सफाई के बाद लोग फिर से नदी में कचरा आदि लाकर फेंकने लगे हैं जिस कारण नदी में व्यापक जगहों पर कचरे का अंबार लग गया है। स्थानीय दुकानदार, बैग कारखाने तथा घरों के कचरे नदी में फेंक रहे हैं जिससे बारिश होने के बावजूद कचरा पानी में नहीं बह रहा है। इसके लिए जहांगिरी मुहल्ला स्थित इकबाल सेतु के समीप जेसीबी मशीन लगाकर जमे कचरे के मलबे को पानी में बहाने का काम किया जा रहा है। नगर निगम के अभियंताओं का कहना है कि लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन लोग है कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। अगर नदी किनारे जमे मलबे को पानी में नहीं बहाया गया तो बारिश होने पर नदी का जलस्तर बढ़ जाएगा। इस स्थिति में नदी का पानी का बहाव रुक जाएगा और पानी इलाके में प्रवेश कर जाएगा। नदी में कचरा फेंकने वाले पर जुर्माना लगाना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर लोग लापरवाह होकर बार-बार जान-बूझकर कचरा नदीं में फेंकते रहेंगे।