करोड़ों रुपये की ठगी करने के अभियुक्त को लिया गया रिमांड पर

करोड़ों रुपये की ठगी करने के अभियुक्त को लिया गया रिमांड पर
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आसनसोल : आसनसोल के एक व्यक्ति से करोड़ों रुपये की ठगी करने से संबंधित मामले में आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की आसनसोल साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 1 अभियुक्त को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार होने वाले अभियुक्त का नाम प्रियव्रत दास बताया गया है। वह बांकुड़ा का रहने वाला है। उसे शनिवार को आसनसोल जिला अदालत के सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। मामले के जांच अधिकारी ने इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर उक्त कांड में शामिल कुछ अन्य अभियुक्तों की भी गिरफ्तारी समेत मामले पर अपनी विशेष छानबीन करने का हवाला देते हुए अभियुक्तों को रिमांड पर लेने की अपील अदालत से की। अदालत ने अभियुक्तों की जमानत अर्जी रद्दकर उसे 7 दिनों की रिमांड पर पुलिस के साथ भेज दिया।

क्या था पूरा मामला ?

बताया जाता है कि बीते 29 मई को शिकायतकर्ता को सुबह 9 बजे दूरसंचार विभाग से दावा करने वाले व्यक्तियों का एक फोन आया था। उसने उन्हें बताया कि शिकायतकर्ता के आधार कार्ड के नंबर का उपयोग करके मुंबई में एक मोबाइल सिम कार्ड नंबर जारी किया गया था और एक केनरा बैंक का खाता भी था जिसमें करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ था। दोनों अवैध गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग अपराध में शामिल हैं। वहीं जालसाजों ने खुद को मुंबई पुलिस/सीबीआई से बताया तथा कथित तौर पर उन्होंने शिकायतकर्ता को बताया कि उन पर नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े होने का संदेह है। उन्होंने शिकायतकर्ता को भारत के सर्वोच्च न्यायालय/सीबीआई का जाली दस्तावेज भेजा। कथित तौर पर उन्होंने शिकायतकर्ता को मामले को गोपनीय रखने के लिए कहा और उन्हें चेतावनी दी कि अगर वह दोषी पाए गए तो उन्हें 5 साल की कैद की सजा होगी और उनकी सारी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। वहीं जालसाज शिकायतकर्ता को रोजाना 8 से 10 बार व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए कॉल करते थे और शुरुआती 22 दिनों तक 24 घंटे निगरानी में रखते थे और पैसों के बारे में सारी जानकारी लेते थे। उन लोगों ने शिकायतकर्ता को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले का डर दिखाकर जबरन वसूली की और उनकी सारी बचत राशि को ट्रांसफर करने पर मजबूर किया। डर के कारण शिकायतकर्ता को अपनी सारी बचत, एफडी, स्टॉक और म्यूचुअल फंड के कुल 3 करोड़ 68 लाख रुपये को शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी के बैंक खातों से 13 किस्तों में उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद शिकायतकर्ता ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी। फिलहाल उक्त मामले पर पुलिस की छानबीन शुरू कर दी गई है।

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